प्रेसवार्ता में अपनी बात कहते पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ दलजीत सिंह चीमा
पंजाब के पूर्व शिक्षा मंत्री व शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने रूपनगर (रोपड़) में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने हालिया चुनाव प्रक्रिया को लेकर आयोग की निष्पक्षता पर संदेह व्यक्त किया। डॉ. च
स्वतंत्र जांच के लिए क्यों नहीं भेजी ऑडियो
उनके अनुसार, जिस ऑडियो की स्वतंत्र जांच के लिए चंडीगढ़ भेजी जानी थी, उसे भी चुनाव आयोग ने आगे नहीं बढ़ाया। उन्होंने दावा किया कि सरकार की बदनामी के डर से चुनाव आयोग ने इस पूरे मामले में निष्क्रियता बरती। डॉ. चीमा ने कहा कि राज्य मशीनरी का दुरुपयोग कर लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास किया गया, लेकिन पंजाब के लोगों ने साहस दिखाया। उन्होंने मतदान प्रतिशत पर भी सवाल उठाए।
कई स्थानों पर सरपंचों को धमकाया
उन्होंने बताया कि 1 करोड़ 38 लाख मतदाताओं में लगभग 80 लाख लोगों ने ही मतदान किया। यह आंकड़ा दर्शाता है कि जनता का सिस्टम पर भरोसा लगातार कम हो रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई स्थानों पर सरपंचों को धमकाया गया। उन्हें चेतावनी दी गई कि यदि उनके गांव में सरकार हारती है तो उनके खिलाफ जांच शुरू की जाएगी। डॉ. चीमा के अनुसार, भय और दबाव के ऐसे माहौल में निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं हैं।
अकाली दल के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं
पार्टी में वापसी के संबंध में, डॉ. चीमा ने स्पष्ट किया कि शिरोमणि अकाली दल के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। यदि कोई व्यक्ति सच्चे दिल से वापसी करना चाहता है, तो उसका स्वागत है, लेकिन पार्टी की अपनी एक मर्यादा भी है। अंत में, डॉ. चीमा ने सभी राजनीतिक दलों से पंजाब के भविष्य को ध्यान में रखते हुए जिम्मेदारी से काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब सभी संस्थाएं निष्पक्षता और ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाएंगी।
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