आज राजधानी की शाम कुछ अलग होगी। ठंड के मौसम में जलते दीयों की रोशनी, ढोल की थाप और गुड़-तिल की मिठास के साथ दिल्ली एक बार फिर पंजाब की खुशबू से महक उठेगी। कई सोसायटियों और कॉलोनियों में सामूहिक लोहड़ी का आयोजन किया गया, जिसमें डीजे नाइट, खान-पान के स्टॉल, पुरानी दिल्ली का स्वादिष्ट पकवान, बॉर्न फायर के इंतजाम किए गए हैं।
खुले अलाव की जगह सांकेतिक अग्नि, दीया-सर्कल
ग्रेटर कैलाश-1 आरडब्ल्यूए, कालकाजी एक्सटेंशन आरडब्ल्यूए और मालवीय नगर आरडब्ल्यूए से जुड़ी सोसायटियों में आज यह पर्व सामूहिक उल्लास और सांस्कृतिक आत्मीयता के साथ मनाया जाएगा। इस बार लोहड़ी का स्वरूप थोड़ा बदला हुआ है। खुले अलाव की जगह कई कॉलोनियों में सांकेतिक अग्नि, दीया-सर्कल और रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ा जा रहा है।
आयोजकों का कहना है हम परंपरा भी निभा रहे हैं और प्रकृति को भी सहेज रहे हैं। कार्यक्रम की मुख्य विशेषताओं में पुरानी दिल्ली का स्वादिष्ट पकवान, पारंपरिक अलाव, लोक संगीत और सामूहिक खान-पान की व्यवस्था शामिल हैं। आज गुरुद्वारों में विशेष अरदास और लंगर के साथ लोहड़ी मनाई जाएगी, जहां हर समुदाय के लोग कंधे से कंधा मिलाकर शामिल होंगे।
बच्चों और बुजुर्गों की अलग लोहड़ी
साकेत की रहने वाली नौ साल की मानवी फोन पर लोहड़ी की गीत सुन रही हैं तो वहीं उसकी 78 वर्षीय दादी सुरों सरबजीत कौर ने बताया कि जहां एक तरफ नई पीढ़ी त्योहार को तकनीक के जरिये समझ रही है, वहीं हम बुजुर्गों की यादों में आज भी गलियों में गूंजती ढोल की थाप और अलाव की गर्माहट जिंदा है।
बाजारों में बढ़ी रौनक
तिलक नगर, लाजपत नगर, करोल बाग और लक्ष्मी नगर के बाजारों में त्योहार का असर साफ दिख रहा है। ड्रायफ्रूट, पारंपरिक परिधान, खिलौने और गिफ्ट पैक की मांग बढ़ी है। दुकानदारों के अनुसार लोहड़ी ने सर्दियों के बाजार में नई रौनक भर दी है। बाजार में जगह जगह गजक और रेवड़ी की दुकानें सजी हुई हैं। दुकानों पर तिल से बनी गजक, गुड़ वाली रेवड़ी, मूंगफली के पैकेट और पॉपकॉर्न के ढेर लगे हुए हैं।
लोहड़ी हमारे लिए सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का अवसर है। हम अपनी सोसाइटी में डीजे नाईट, बॉर्न फाइन, पुरानी दिल्ली का स्वादिष्ट पकवान के साथ डिनर करते हुए लोहड़ी का उत्सव मनाएगें। — संजय आनंद, अध्यक्ष, ग्रेटर कैलाश आरडब्ल्यूए
ये पर्व हमें भाईचारा और संस्कृति को जोड़ने के संदेश देते हैं। लोहड़ी के कार्यक्रम में अलाव, संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम पूरे माहौल को खास बना देते हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी इस उत्सव का आनंद ले रहे हैं और यही लोहड़ी की सबसे बड़ी खूबसूरती है। — राकेश डब्बास, साकेत आरडब्ल्यूए
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