देहरा(कांगड़ा). एक हंसते खेलते परिवार की खुशियां पल भर में मातम में बदल गईं. दो बहनों ने अपना इकलौता भाई खो दिया. माता-पिता की सूनी गोद हमेशा के लिए खाली हो गई. मामला हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के देहरा का है.
दरअसल, देहरा की ग्राम पंचायत ठठलेहड़ के गांव अंब लाहड़, पोस्ट ऑफिस घेड़ मानगढ़ निवासी 17 वर्षीय आदर्श कुमार पुत्र संजय कुमार की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत हो गई. यह हादसा शुक्रवार देर शाम एनएच-503 पर खबली दोसड़का, देहरा के समीप उस समय हुआ, जब वह देहरा बाजार से नए कपड़े खरीदकर अपने घर लौट रहा था.
जानकारी के अनुसार, आदर्श की बाइक अचानक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे लगे आम के पेड़ से जा टकराई. टक्कर इतनी भीषण थी कि वह गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़ा. हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई. स्थानीय लोगों ने तुरंत उसे संभाला और गंभीर हालत में देहरा अस्पताल पहुंचाया, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद उसे टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया. डॉक्टरों ने उसे बचाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन देर रात उसने दम तोड़ दिया.
पढ़ाई में होनहार, परिवार की उम्मीदों का केंद्र था आदर्श
आदर्श कुमार गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल बनखंडी में प्लस टू का छात्र था. वह पढ़ाई में मेहनती, व्यवहार में सरल और मिलनसार स्वभाव का था. स्कूल में जल्द होने वाली फेयरवेल पार्टी की तैयारियों में वह पूरे उत्साह के साथ जुटा हुआ था. सहपाठी उसे एक मददगार दोस्त के रूप में जानते थे. लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था.
22 दिन पहले खरीदी थी नई बाइक
परिजनों के अनुसार, आदर्श ने करीब 22 दिन पहले 220 सीसी पल्सर एन सीरीज बाइक खरीदी थी. बाइक लेने की उसकी जिद ही काल का कारण बन गई. माता-पिता की तमाम समझाइश के बावजूद उसने यह बाइक ली थी. परिवार को क्या पता था कि यही बाइक उसकी अंतिम यात्रा बन जाएगी.
दो बहनों का इकलौता भाई था आदर्श
आदर्श दो बहनों का इकलौता भाई था. बड़ी बहन प्रिया (26) बठिंडा में नर्स के रूप में कार्यरत हैं, जबकि छोटी बहन रिया (24) चंडीगढ़ की एक निजी कंपनी में सीए हैं. भाई की असमय मौत से दोनों गहरे सदमे में हैं. परिजनों के अनुसार, बहनों के लिए आदर्श सिर्फ भाई नहीं, बल्कि जीवन का सबसे मजबूत सहारा था.
पिता चलाते हैं छोटी दुकान, बेटे से थीं बड़ी उम्मीदें
आदर्श के पिता संजय कुमार एक छोटी सी दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं. सीमित आय के बावजूद उन्होंने बच्चों की पढ़ाई और उज्ज्वल भविष्य के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी. आदर्श परिवार का इकलौता बेटा था और माता-पिता के बुढ़ापे का सहारा माना जाता था. बेटे की मौत ने उनके जीवन में ऐसा खालीपन छोड़ दिया है, जिसे भर पाना असंभव नजर आ रहा है. मां कविता की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है और घर में कोहराम मचा है.
क्षेत्र में शोक की लहर, पुलिस कर रही जांच
आदर्श का अंतिम संस्कार उसके पैतृक गांव में किया गया. पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है. गांव के लोग, रिश्तेदार, शिक्षक और छात्र गहरे सदमे में हैं. देहरा पुलिस जिला के एसपी मयंक चौधरी ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि मामले की जांच की जा रही है और दुर्घटना के सभी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल की जा रही है.
नाबालिग के हाथ में हैंडल
गौरतलब है कि नाबालिग बच्चों का वाहन चलाना लगातार चिंता का विषय बनता जा रहा है. कानूनन 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को वाहन चलाने की अनुमति नहीं है. बावजूद इसके कई अभिभावक भावनाओं में बहकर बच्चों को वाहन सौंप देते हैं और लापरवाही की वजह से बच्चों के साथ-साथ दूसरों की जान पर खतरा बना रहता है. ऐसे में अभिभावक जिम्मेदारी समझें और कानून का सख्ती से पालन करें.
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