पूर्व मध्य रेल के धनबाद मंडल में आरपीएफ ने वन्यजीव तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 16 जिंदा कछुए बरामद किए हैं। यह कार्रवाई ऑपरेशन WILEP के तहत की गई। आरपीएफ को गुप्त सूचना मिली थी कि ट्रेन संख्या 13010 योग नगरी ऋषिकेश-हावड़ा दून एक्सप्रेस से कछुओं की तस्करी की जा रही है। सूचना मिलते ही आरपीएफ पोस्ट और सीआईबी की संयुक्त टीम सक्रिय हो गई। ट्रेन के धनबाद रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या दो पर पहुंचते ही जांच अभियान शुरू किया गया। अधिकारियों ने विशेष रूप से जनरल कोचों की सघन तलाशी ली, क्योंकि सूचना इसी श्रेणी के डिब्बे से जुड़ी थी। लावारिस नीले थैले में मिले इंडियन फ्लैपशेल प्रजाति के कछुए जांच के दौरान इंजन की ओर से दूसरे सामान्य कोच में एक सीट के नीचे नीले रंग का कपड़े का लावारिस थैला मिला। मौके पर मौजूद यात्रियों से पूछताछ की गई, लेकिन किसी ने भी उस थैले पर अपना दावा नहीं किया। संदेह गहराने पर ट्रेन के प्रस्थान से पहले थैले को प्लेटफॉर्म पर उतारकर गवाहों की मौजूदगी में खोला गया। अंदर जूट के बोरे में रखे इंडियन फ्लैपशेल प्रजाति के कुल 16 जीवित कछुए बरामद हुए। कछुओं को बेहद संकुचित अवस्था में रखा गया था, जिससे उनकी हालत नाजुक हो सकती थी। आरपीएफ ने तत्काल जब्ती सूची तैयार कर सभी कछुओं को अपने कब्जे में लिया और पोस्ट लाया। वन विभाग को सौंपे जाएंगे आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार बरामद कछुए वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संरक्षित प्रजाति में आते हैं। इस तरह की तस्करी गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है। कछुओं को सुरक्षित रखने के बाद उन्हें वन विभाग को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, ताकि उनकी समुचित देखभाल और प्राकृतिक आवास में पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सके। इस कार्रवाई में आरपीएफ के चितरंजन सिंह, शशिकांत तिवारी, बबुलेश कुमार, प्रमोद कुमार, संजीव कुमार और अमित कुमार वर्मा की अहम भूमिका रही। आरपीएफ ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीव तस्करी के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और इस मामले में तस्करों की पहचान के लिए जांच तेज कर दी गई है।
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