इस मंडी की खासियत यह है कि यहाँ पश्चिम बंगाल, बिहार, छत्तीसगढ़ और झारखंड के अलग-अलग इलाकों से ताज़ी सब्जियाँ सुबह-सुबह पहुंच जाती हैं. झरिया की इस मंडी से चंदनक्यारी, बोकारो, रायगंज, तोपचांची, सिंदरी सहित आसपास के कई इलाकों के व्यापारी खरीदारी कर अपने-अपने बाजारों में सब्जियां और फल बेचते हैं.
सर्दियों में बंगाल की सब्जियों की धूम
सर्दियों में बंगाल की सब्जियों की धूम सर्दी के मौसम में पश्चिम बंगाल के मुर्शीदाबाद क्षेत्र से पटल करेला, परवल, बंदा, गोभी और फूलगोभी की अच्छी आवक होती है. वहीं रांची की चीन मटर, शिमला मिर्च, बिहार का नया आलू और छत्तीसगढ़ का बैंगन भी इन दिनों थोक विक्रेताओं की पहली पसंद बने हुए हैं. ताज़गी और कम कीमत के कारण व्यापारी भारी मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं
आज के मंडी भाव की बात करें तो थोक बाजार
रांची की मटर: ₹40 प्रति किलो शिमला मिर्च: ₹40 प्रति किलो नया आलू: ₹10 प्रति किलो बैंगन ₹25 प्रति किलो सेम ₹8 से ₹10 प्रति किलो फूलगोभी ₹8 से ₹10 प्रति पीस पत्ता गोभी (बंगाल से आयातित): ₹10 प्रति पीस झरिया मंडी को सस्ता और टिकाऊ इसलिए भी माना जाता है क्योंकि यहाँ से खरीदी गई सब्जियाँ लंबे समय तक खराब नहीं होतीं, जिससे खुदरा विक्रेताओं को नुकसान कम होता है.
फल मंडी भी है खास
फल मंडी में भी देश के विभिन्न राज्यों से फल पहुँच रहे हैं. व्यापारी राजेश कुमार के अनुसार सेब कश्मीर से आता है, जिसकी कीमत ₹650 प्रति पेटी माल्टा पंजाब से, कीमत ₹900 प्रति पेटी अनार नासिक से, कीमत ₹700 प्रति पेटी तरबूज महाराष्ट्र से, कीमत ₹500 प्रति पेटी यहाँ सभी फल और सब्जियाँ थोक में पेटी या पैकेट के हिसाब से बेची जाती हैं, जिसे बाद में व्यापारी अपने बाजारों में किलो के भाव से बेचते हैं.
मंडी में नहीं है शौचालय
सुविधाओं का अभाव बना बड़ी समस्या जहाँ एक ओर झरिया मंडी व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है, वहीं दूसरी ओर यहाँ मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है.व्यापारी महफूज ने बताया कि वे पिछले 10 वर्षों से झरिया मंडी में व्यापार कर रहे हैं, लेकिन आज तक यहाँ न तो ढंग का शौचालय है और न ही पीने के पानी की सुविधा. शौचालय के लिए व्यापारियों को लगभग 2 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है, जिससे भारी परेशानी होती है.
व्यापारियों का कहना है कि दूर-दराज़ से हजारों की संख्या में लोग यहाँ खरीदारी के लिए आते हैं और कई राज्यों से माल पहुँचता है, इसके बावजूद बुनियादी सुविधाओं का न होना प्रशासन की अनदेखी को दर्शाता है.जिला प्रशासन से मांग व्यापारियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जब उन्हें एक छत के नीचे व्यापार करने के लिए जगह दी गई है.
शौचालय, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई जाएँ. इससे न केवल व्यापारियों को राहत मिलेगी, बल्कि झरिया मंडी का संचालन और अधिक सुचारू हो सकेगा.झरिया सब्जी मंडी आज भी धनबाद जिले की जीवनरेखा बनी हुई है, बस जरूरत है इसे सुविधाओं के लिहाज से भी उतना ही मजबूत बनाने
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