असीम मुखर्जी की पेंटिंग्स में झारखंड की संस्कृति, इतिहास और जनजीवन की सजीव झलक मिलती है. झारखंड के भगवान कहे जाने वाले बिरसा मुंडा की पेंटिंग हो या विश्वविख्यात कवि और विचारक रवींद्रनाथ टैगोर की तस्वीर. असीम की हर कृति में भावनाओं और यथार्थ का सुंदर समन्वय दिखाई देता है. बिरसा मुंडा की पेंटिंग को उन्होंने बेहद बारीकी से उकेरा है. रवींद्रनाथ टैगोर की पेंटिंग को तैयार करने में उन्हें करीब 7 से 8 दिन का समय लगा था.
हाल ही में असीम मुखर्जी ने एक विशेष पेंटिंग तैयार की है जिसमें कोयला खदानों में काम करने वाले मजदूरों का जीवन चित्रित किया गया है. इस पेंटिंग को तैयार करने में उन्हें लगभग 15 दिन का समय लगा. चित्र में यह स्पष्ट रूप से दिखाई देता है कि कैसे धधकती आग और कोयले के बीच मजदूर अपने जीवन-यापन के लिए कठिन परिश्रम करते हैं. इस पेंटिंग के माध्यम से उन्होंने धनबाद और आसपास के कोयलांचल क्षेत्र की सच्चाई को कला के रूप में प्रस्तुत किया है. यह पेंटिंग वर्तमान में दिल्ली में प्रदर्शनी के लिए भेजी गई है और न्यू दिल्ली स्थित ललित कला अकादमी तक भी उनकी एक पेंटिंग पहुंच चुकी हैं.
असीम मुखर्जी वाटर कलर, ऑयल कलर और ऐक्रेलिक जैसे विभिन्न माध्यमों का उपयोग करते हैं. सामान्यतः वे कॉटेज पेपर या आईसीडी पेपर पर वाटर कलर से पेंटिंग बनाते हैं, जिसमें एक पेंटिंग को तैयार करने में लगभग 6 से 7 दिन का समय लगता है. वहीं, कैनवस पेपर पर बनाई गई ऑयल पेंटिंग्स की उम्र काफी लंबी होती है. उनके अनुसार, यदि कैनवस पर ऑयल कलर से पेंटिंग बनाई जाए तो वह लगभग 100 वर्षों तक सुरक्षित रह सकती है, जैसे कि संग्रहालयों में रखी जाने वाली कलाकृतियां.
चित्रकला के साथ-साथ असीम मुखर्जी समाजसेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं. वे धनबाद के विभिन्न इलाकों सिंदरी, बलियापुर, चासनाला सहित आसपास के कई सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में फाइन आर्ट्स की शिक्षा निःशुल्क प्रदान करते हैं. उनका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले उन बच्चों तक कला की शिक्षा पहुंचाना है जिनके पास संसाधनों की कमी है लेकिन, प्रतिभा की कोई कमी नहीं है. आज असीम मुखर्जी से प्रशिक्षण प्राप्त कई छात्र-छात्राएं चित्रकला के क्षेत्र में अच्छा नाम और आमदनी कमा रहे हैं. उनके कुछ शिष्य पेंटिंग बनाकर अपनी आजीविका चला रहे हैं. तो कई छात्र देवी-देवताओं की मूर्तियां जैसे भगवान गणेश, मां दुर्गा और मां सरस्वती मिट्टी और प्लास्टर से बनाकर अच्छा रोजगार प्राप्त कर रहे हैं. इस तरह उनके शिष्य आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं.
असीम मुखर्जी का मानना है कि फाइन आर्ट्स का मुख्य उद्देश्य यही है कि कला में रुचि रखने वाले बच्चे महिलाएं और पुरुष आगे बढ़ें. अपनी प्रतिभा को पहचानें और उसे रोजगार का माध्यम बनाएं. कला को केवल शौक न मानकर जीवन का हिस्सा बनाएं और आत्मनिर्भर बनें.
पेंटिंग से कर रहे हैं गरीब बच्चों के इलाज में मदद
साल 2024 में असीम मुखर्जी की पेंटिंग्स को यूरोप के स्वीडन में आयोजित चैरिटी आर्ट एक्सपो के तहत एक पुस्तक में प्रकाशित किया गया. इस पुस्तक में भगवान बिरसा मुंडा, कोयला खदानों में काम करने वाले मजदूरों और रवींद्रनाथ टैगोर सहित उनकी कई महत्वपूर्ण पेंटिंग्स शामिल हैं. इस पुस्तक से होने वाली आय को चैरिटी के उद्देश्य से उपयोग किया जा रहा है. खास बात यह है कि इस आय से उन गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों के इलाज में मदद की जा रही है जो गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं और इलाज कराने में असमर्थ हैं.
असीम मुखर्जी के फाइन आर्ट से जुड़ने के लिए दिए गए नंबर 7260073488 पर संपर्क कर अच्छी पेंटिंग बनाना सीख सकते हैं. इस तरह असीम मुखर्जी अपनी कला के माध्यम से न केवल धनबाद का नाम रोशन कर रहे हैं. बल्कि जरूरतमंदों की मदद कर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं. उनकी यह पहल निस्संदेह सराहनीय है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है.
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