बैद्यनाथ धाम की सबसे अनोखी विशेषताओं में से एक इसकी परंपराएं हैं.जो अन्य किसी भी ज्योतिर्लिंग से इसे अलग बनाती हैं.आमतौर पर सभी ज्योतिर्लिंगों में भगवान शिव के पास त्रिशूल विराजमान होता है. बाबा बैद्यनाथ मंदिर के शिखर पर पंचशूल स्थापित है. यह पंचशूल मंदिर की विशिष्ट पहचान है
बैद्यनाथ धाम की सबसे अनोखी विशेषताओं में से एक इसकी परंपराएं हैं.जो अन्य किसी भी ज्योतिर्लिंग से इसे अलग बनाती हैं. आमतौर पर सभी ज्योतिर्लिंगों में भगवान शिव के पास त्रिशूल विराजमान होता है. बाबा बैद्यनाथ मंदिर के शिखर पर पंचशूल स्थापित है. यह पंचशूल मंदिर की विशिष्ट पहचान है और इसकी धार्मिक मान्यता भी अत्यंत गहरी मानी जाती है.

यह ज्योतिर्लिंग इसलिए भी विशेष है क्योंकि यह एकमात्र ऐसा धाम है. जहां एक ही मंदिर परिसर में भगवान शिव और माता पार्वती के साथ-साथ 22 से अधिक देवी-देवताओं के दर्शन और पूजन का सौभाग्य श्रद्धालुओं को प्राप्त होता है.इस कारण यह स्थान केवल शिवभक्तों ही नहीं, बल्कि समस्त सनातन श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा केंद्र है.

बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग को अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जिनमें मनोकामना लिंग प्रमुख है.भक्त यहां आकर पूजा-अर्चना करते हैं, जलाभिषेक करते हैं और अपनी मनोकामनाएं बाबा के चरणों में अर्पित करते हैं. मान्यता है कि बाबा बैद्यनाथ अपने भक्तों की हर सच्ची प्रार्थना सुनते हैं और उन्हें निराश नहीं लौटाते.
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मंदिर में आने वाले श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अनुसार दान भी करते हैं.बाबा बैद्यनाथ मंदिर परिसर में कुल 18 दानपात्र रखे गए हैं.जिनमें भक्त अपनी भेंट अर्पित करते हैं. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और दान को सेवा व पुण्य का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है.

इन 18 दानपात्रों को मंदिर प्रशासन द्वारा समय-समय पर खोला जाता है. प्रक्रिया प्रशासन और मंदिर मजिस्ट्रेट विवेक जी की देखरेख में पारदर्शिता के साथ संपन्न की जाती है, जिसके बाद दान राशि की गिनती की जाती है। इस अवसर पर मंदिर प्रांगण में विशेष व्यवस्था भी की जाती है.

बैद्यनाथ धाम की ख्याति केवल भारत तक सीमित नहीं है. यहां विदेशों से भी श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं और दानपात्रों में भेंट चढ़ाते हैं. यही कारण है कि दानपात्रों में भारतीय मुद्रा के साथ-साथ अमेरिकी डॉलर, नेपाली रुपये, तिब्बती मुद्रा और अन्य विदेशी करेंसी भी देखने को मिलती है.

आज मंदिर प्रशासन की देखरेख में बाबा मंदिर प्रांगण स्थित सभी 18 दानपात्र खोले गए। गिनती के बाद दानपात्रों से कुल 15,53,215 रूपए की नकद आय प्राप्त हुई. इसके अलावा नेपाली मुद्रा 1525 रूपए, 1 अमेरिकी डॉलर और 10 दिरहम भी दान स्वरूप मिले.यह बाबा बैद्यनाथ में अटूट आस्था और वैश्विक श्रद्धा का जीवंत प्रमाण है.
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