राजधानी में लगातार चार दिन से बेहद खराब श्रेणी में हवा बरकरार होने के बाद शनिवार को फिजा गंभीर श्रेणी में पहुंच गई। वहीं, दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने शनिवार को ग्रेप चार लागू कर दिया। रविवार सुबह दिल्ली का एक्यूआई 400 पार दर्ज किया गया है। दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 437 दर्ज किया गया है, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है।
बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण शनिवार को दिल्ली और एनसीआर में एक बार फिर ग्रेप-4 की पाबंदियां लागू कर दी गई हैं। यह फैसला 21 नवंबर 2025 के आदेश के तहत लिया गया है और इसे पूरे एनसीआर में तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। शाम चार बजे दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 400 दर्ज किया गया, जो रात 8 बजे बढ़कर 428 तक पहुंच गया। रविवार सुबह यह बढ़कर 437 पहुंच गया मौसम विभाग (आईएमडी) और आईआईटीएम के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में वायु गुणवत्ता और खराब हो सकती है। इसे देखते हुए ग्रेप पर उप-समिति ने आपात बैठककर स्टेज-चार की सभी कार्रवाईयों को लागू करने का फैसला किया। अब दिल्ली में बीएस-IV ट्रकों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।
हालांकि, आवश्यक वस्तुएं ले जाने वाले ट्रक, आपात सेवाओं से जुड़े वाहन और सीएनजी, एलएनजी, इलेक्ट्रिक व बीएस-VI डीजल ट्रकों को छूट दी गई है। एक नवंबर 2025 से दिल्ली के बाहर पंजीकृत बीएस-III और उससे पुराने डीजल कमर्शियल मालवाहक वाहनों की एंट्री पूरी तरह प्रतिबंधित है, चाहे वे आवश्यक सेवाओं से ही क्यों न जुड़े हों। आयोग ने सभी संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया है कि ग्रेप के स्टेज-एक से चार तक के सभी नियमों को सख्ती से लागू किया जाए। साथ ही, नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे प्रदूषण कम करने के लिए जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है। 101-200 का मतलब वायु प्रदूषण का स्तर मध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब और 301 से 400 के बीच का अर्थ वायु गुणवत्ता की बेहद खराब श्रेणी को दर्शाता है। 401 से 500 की श्रेणी में वायु की गुणवत्ता गंभीर बन जाती है। ऐसी स्थिति में इंसान की सेहत को नुकसान पहुंचता है। पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह जानलेवा है।
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