“हम पूरी रात उसे ढूंढते रहे।एक-एक थाने के चक्कर लगाए उसका फोन बजता रहा, लेकिन सिस्टम खामोश रहा।” ये शब्द हैं 25 वर्षीय कमल ध्यानी के परिजनों के हैं। परिजन और दोस्तों का आरोप है कि कहीं से ठोस मदद नहीं मिली। कमल के जुड़वा भाई करण का कहना है कि पुलिस ने कहा रात में सर्च संभव नहीं, शिकायत सुबह दर्ज होगी। यही जवाब परिवार के लिए सबसे बड़ा सदमा बन गया।
परिवार और दोस्तों का सवाल सीधा है कि जब फोन पूरी रात एक्टिव था, लोकेशन मिल रही थी, तो गड्ढे वाले रास्ते की तलाशी क्यों नहीं ली गई? पुलिस मोबाइल फ्लैश जलाकर तलाश के नाम पर अंधेरे में तीर चलाती रही, जबकि दिल्ली पुलिस देश की आधुनिक तकनीक से लैस मानी जाती है और इसका भारी भरकम बजट करीब 13 हजार करोड़ का है।
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बाइक सवार युवक की मौत के बाद दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल के शवगृह के बाहर भावुक बैठे परिजन
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‘देर न होती, तो क्या पता उसकी जान बच जाती’
कमल के भाई मयंक का आरोप है कि अगर पुलिस थोड़ी मदद कर देती, तो शायद हम उसे रात में ही ढूंढ लेते। देर न होती, तो क्या पता उसकी जान बच जाती। परिजनों ने दिल्ली जल बोर्ड और ठेकेदार पर घोर लापरवाही का आरोप लगाया है और किसी साजिश से भी इनकार नहीं किया। हालांकि पुलिस ने फिलहाल किसी फाउल प्ले से इनकार करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण हादसा बताया है।
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जल बोर्ड के गड्ढे में गिरा बाइक सवार, मदद न मिलने से तपड़कर मौत, बाइक निकालती टीम
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दिल्ली पुलिस ने परिवार के आरोपों से इनकार किया है। पुलिस के अनुसार, रात करीब 2.50 बजे परिजन थाने पहुंचे थे, मोबाइल लोकेशन ट्रेस की गई, डिस्ट्रिक्ट पार्क और आसपास के इलाकों में तलाश भी हुई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
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मैंने कलेजे का टुकड़ा खो दिया..
कमल के शव का जब पोस्टमार्टम हो रहा था, तो दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस के बाहर इंसानों का नहीं, दर्द और खामोशी का हुजूम था। भीड़ में खड़े थे पिता नरेश का जवान बेटा कमल, जो अब सिर्फ फाइल नंबर बनकर रह गया। अपने बेटे को खो चुके नरेश से जब भी कोई बात करने की कोशिश करता, जवाब एक ही था कि मेरे पास बात करने को कुछ नहीं है। मैंने कलेजे का टुकड़ा खोया है।
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जुड़वा खुशियों को न जाने लगी किसकी नजर
जुड़वा भाई को करण अपनी यादों में खोज रहे थे। भर्राई हुई आवाज में बोले, उसे बाइक का बड़ा शौक था। तीन साल पहले जन्मदिन पर, अपने पैसों से बाइक खरीदी थी। पूरा परिवार खुश था जिस बाइक को उसने खुशी से खरीदा, उसी बाइक के साथ वह आखिरी वक्त तक रहा। पता नहीं उसकी खुशियों को किसकी नजर लग गई।