Dehradun News: देहरादून में उत्तराखंड वन विकास निगम के रिटायर्ड कर्मचारी बेहद कम पेंशन और वर्षों से अटकी ग्रेच्युटी से परेशान हैं. कई बुजुर्गों को 2700–3500 रुपये ही पेंशन मिल रही है, जबकि लाखों रुपये का बकाया है. इलाज और पारिवारिक जरूरतों के लिए भी पैसे नहीं हैं. हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद भुगतान नहीं हुआ. कई पेंशनर्स बकाया का इंतजार करते हुए दुनिया छोड़ चुके हैं, जिससे कर्मचारियों में गहरा आक्रोश है.
श्रीकृष्णा नैथानी बताते हैं कि उन्होंने कई साल उत्तराखंड वन विकास निगम में स्केलर के पद पर सेवाएं दी और साल 2022 में रिटायर्ड हो गए थे. तब से अब तक उनका पूर्ण भुगतान नहीं हो सका है. उन्होंने कहा कि उन्हें डायबिटीज की शिकायत हो गई है. इसके साथ ही जंगल के क्षेत्र में काम करने के चलते उनकी आंख खराब हो गई. उन्होंने कहा कि हमारी स्थिति इतनी खराब हो गई है कि एक आंख पूरी बंद हो गई है और दूसरी से भी 50 फीसद ही मानो देख पाते हैं. उन्होंने बताया कि उन्हें महंगे इंजेक्शन लगते हैं और इलाज के लिए पैसा न होने के चलते उनका बुढ़ापा खराब हो गया है. उनकी पत्नी भी बीमार रहती है. उन्होंने कहा कि मेरी 72 हजार रुपए तनख्वाह थी, लेकिन अब ₹3500 ही पेंशन मिल पाती है और उनका लगभग 30 से 35 लाख रुपए बकाया है.
इंतजार करते- करते भगवान को प्यारे हो गए कई पेंशनर्स
सत्यप्रसाद बिजलवान ने बताया कि उन्हें सेवानिवृत हुए लगभग 6 साल हो चुके हैं. उन्होंने कहा कि अब तक उनका इनकेसमेंट और ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं किया गया है, जबकि न्यायालय द्वारा 12 फरवरी 2025 को स्पष्ट आदेश दिया गया था कि रिटायर्ड कर्मचारियों का भुगतान किया जाए. उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को आस होती है कि रिटायर्ड होने के बाद उनके बुढ़ापे का सहारा जिंदगी के अंतिम दौर को सही से गुजार दे. उन्होंने कहा कि मैं खुद बीपी, शुगर का मरीज हूं और मेरी पत्नी के फेफड़े में समस्या है और मात्र 2700 रुपए मुझे पेंशन मिलती है, इसमें कैसे गुजारा किया जाए. हमारे कई साथी अपने बकाया भुगतान का इंतजार करते-करते भगवान को प्यार हो गए हैं, जिनकी लड़ाई लड़ने वाला कोई नहीं है, इसलिए हम उनकी लड़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि मंत्री- नेताओं को तो थोड़े समय बीतने पर ही हर पद पर पेंशन मिलती है, जबकि हम अपनी आधी से ज्यादा उम्र सेवा में लगा देते हैं तो हमें ऐसे भटकना पड़ता है. उत्तराखंड वन विकास निगम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष त्रिलोक सिंह ने बताया कि टाइम पर भुगतान न होने के चलते उन्हें अपनी बेटी की शादी के लिए अपने पूर्वजों से मिली पुश्तैनी संपत्ति को बेचना पड़ा, जो उन्होंने कभी बेचने का सोचा भी नहीं था. उन्होंने कहा हमें 35 -40 साल नौकरी करने के बाद 4200 पेंशन मिल रही है तो हम उम्र के इस पड़ाव में कैसे अपने जीवन का गुजारा कर सकते हैं. हम लगातार हमारे भुगतान और पेंशन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. राजन सिंह राणा बताते हैं कि 2700 रुपए की पेंशन तो है ही और बकाया लेने के लिए भी हम लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं. जबकि नैनीताल हाई कोर्ट में हमारा मामला 6 साल तक चला और हम जीते भी गए. उन्होंने कहा कि पिछले साल फरवरी में हाईकोर्ट के फैसले के बावजूद भी हमारा प्रबंधन कितना ढीला है कि अब तक हमारा काम नहीं हो पाया है.
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पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें
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