Maha Shivratri 2026: टपकेश्वर महादेव मंदिर उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में स्थित एक प्राचीन और चमत्कारी शिव धाम है, जिसे लगभग 6000 साल पुराना माना जाता है. मान्यता है कि आचार्य द्रोण ने यहां 12 वर्षों तक तपस्या की थी. गुफा से शिवलिंग पर टपकती जलधारा के कारण इसे टपकेश्वर कहा गया. शिवरात्रि और सावन में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. यह मंदिर घंटाघर से करीब 7 किमी दूर गढ़ी कैंट क्षेत्र में स्थित है.
टपकेश्वर महादेव मंदिर के मुख्य पुजारी भरत गिरी महाराज ने बताया कि टपकेश्वर मंदिर महाभारत काल से भी पुराना है. उन्होंने बताया कि यह लगभग 6000 साल पुराना माना जाता है. उन्होंने बताया कि कौरव और पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य की यह तपस्थली है और वह अपनी पत्नी के साथ तप करने के लिए हिमालय की ओर आए थे. यहां तमसा नदी के नजदीक ही वह रुक गए और भगवान भोलेनाथ की तपस्या करने लगे. उन्होंने 12 वर्षों तक घोर तपस्या की और इसी दौरान उनके पुत्र अश्वत्थामा का जन्म हुआ. उन्होंने कहा माता कृपि तपस्या करती थी. अश्वत्थामा को भूख लगने लगी तब महादेव ने दुग्ध धारा प्रवाहित की और अश्वत्थामा का पेट भर गया. उसी वक्त से यहां गुफा के भीतर दूध टपका करता था और शिवलिंग पर ये बूंदे अभिषेक किया करती थी, लेकिन कलयुग तक आते- आते ये बूंदें दूध से पानी में परिवर्तित हो गई. उन्होंने बताया कि यहां मंदिर में दर्शन करने के लिए सिर्फ उत्तराखंड के ही लोग नहीं आते हैं, बल्कि विदेश से भी श्रद्धालु बाबा भोलेनाथ के दर्शन करने के लिए आते हैं.
कहां है टपकेश्वर महादेव मंदिर?
अगर आप भी देहरादून के 6 हजार साल पहले के प्राचीन मंदिर टपकेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन करने के लिए आना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले देहरादून के घंटाघर आना होगा जहां से यह लगभग 7 किलोमीटर दूर गढ़ी कैंट क्षेत्र में स्थित है. आप डाकरा बाजार से भी जा सकते हैं. इन दिनों शिवरात्रि का मेला यहां लग रहा है.
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पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें
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