पॉड टैक्सी परियोजना
हाल ही में आवास सचिन और राजेश कुमार ने संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक करते हुए राजधानी में प्रस्तावित पॉड टैक्सी परियोजना की डीपीआर पर बेहतर ढंग से काम करने के निर्देश दिए गए हैं. इस पर देहरादून के लोगों की मिली जुली राय सामने आई है. कई लोगों का कहना है कि इस योजना को लेकर लंबे समय से चर्चा हो रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बताती है, बहरहाल अगर इस पर काम किया जाएगा तो लोगों को जाम से मुक्ति जरूर मिल पाएगी.
देहरादून की रहने वाली अनीता ने बताया कि गाड़ियों की भीड़ इतनी ज्यादा होती है कि अपने बच्चों को स्कूल छोड़ना उनको लाना बहुत मुश्किल होता है और बच्चों की फिक्र भी लगी रहती है कि वे सुरक्षित घर पहुंच जाएं. उन्होंने बताया जब वह बाजार की और आ रही थी तब एक एंबुलेंस में मरीज को लाया जा रहा था, लेकिन गाड़ियों की भीड़ इतनी ज्यादा थी कि उसे जगह नहीं मिल पा रही थी, ऐसा नहीं होना चाहिए. इस पर जितनी जल्दी काम संभव हो जाना चाहिए.
वहीं लीला कंडारी का कहना है कि गाड़ी चलाने वाली महिलाओं के लिए इस भीड़ भाड़ में निकलना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि गाड़ियों का इतना फ्लो होता है कि हमें गाड़ी ड्राइव करने में बहुत मुश्किल होती है, इसलिए सरकार को यातायात प्रबंधन के लिए ऐसी योजनाओं पर काम करना चाहिए और लोगों को भी सिविक सेंस का इस्तेमाल करते हुए गाड़ी चलने चाहिए, ताकि दूसरे लोगों को दिक्कत न हो.
सुहानी जोशी ने बताया कि जो स्टूडेंट्स स्कूल के बाद कॉलेज में दाखिला लेते हैं वह अगर गाड़ी ले लेते हैं तो ऐसी भीड़ में उनके लिए बड़ा चैलेंज हो जाता है, कई लोग गाड़ी को लेकर ही नहीं आना चाहते हैं और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सफर करते हैं. हमें ऐसे बड़ी दिक्कतें होती हैं. उन्होंने बताया कि रेलवे स्टेशन, बल्लूपुर चौक पर इतनी ज्यादा भीड़ होती है कि गाड़ी वाले ही नहीं बल्कि पैदल चलने वाले लोगों के लिए रोड क्रॉस करना भी मुश्किल हो जाता है. खासकर जो स्कूली बच्चे होते हैं उनके लिए तो ऐसा ट्रैफिक जानलेवा सा लगता है.
पॉड टैक्सी परियोजना से ईंधन की बचत, पर्यावरण को नहीं होगा नुकसान
देहरादून के पर्यावरणविद अशीष गर्ग बताते हैं कि ग्रीनपॉड टैक्सी यूरोपीय देशों में काफी प्रचलित है. इसमें इलेक्ट्रिक ड्राइव सिस्टम होता है. यह इकोफ्रेंडली सिस्टम है जिसे बिना ड्राइवर के चलाया जाता है, छोटे कैप्सूल के रूप में चलने वाली इन इलेक्ट्रिक टैक्सी यानी पॉड टैक्सी में लगभग 4-6 लोग आराम से बैठ सकते हैं और बहुत त्वरित रूप से छोटी दूरी का सफर तय कर सकते हैं. इससे ट्रैफिक दबाव कम होता है.
कहां-कहां चलेगा पॉड टेक्सी
अब पॉड टैक्सी परियोजना को ईबीआरटीएस से कनेक्ट किया जाएगा, तो क्लेमेंटाउन से बल्लूपुर चौक, पंडितवाड़ी से रेलवे स्टेशन और गांधी पार्क से आईटी पार्क तक तीन मैन कॉरिडोर बनाए जाएंगे और यही शहर के व्यस्तम रूट हैं. उत्तराखंड के साथ ही मुंबई और नोएडा जैसे बड़े शहरों में पॉड टैक्सी परियोजना पर काम चल रहा है लेकिन साल 2016 से हम देश में पॉड टैक्सी परियोजना पर चर्चा सुनते आ रहे हैं, लेकिन इसे अमली जामा कब पहनाया जाएगा यह भी देखने वाली बात होगी.
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