Dehradun ki local news : उत्तराखंड के पहाड़ों पर गुलदार, भालू और हाथियों के आतंक के बीच बंदरों ने भी उत्पात मचाना शुरू कर दिया है. देहरादून के राजपुर, मोथोरावाला और क्लेमेंट टाउन जैसे कई इलाकों में बंदरों के आतंक से लोग भयभीत हैं. किचन में घुसकर सामान उठा ले जाते हैं. बच्चों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया है. कई लोगों को काट चुके हैं. यहां बंदरों का व्यवहार सिर्फ उछल-कूद तक सीमित नहीं रहा. वे बेहद आक्रामक और बेखौफ हो चुके हैं. भगाने पर झुंड बनाकर हमला कर देते हैं. लोगों का आरोप है कि वन विभाग को बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है.
लोकल 18 से बात करते हुए देहरादून के मोथोरावाला की रहने वाली बीना देवी कहती हैं कि बंदरों के आतंक से हम परेशान हो गए हैं. ये अब खिड़कियों और दरवाजों को खोलकर सीधे किचन में घुस रहे हैं. हालत ये हैं कि बंदर बेखौफ होकर घरों के फ्रिज खोल लेते हैं और खाने-पीने का सामान उठाकर ले जाते हैं. हमारे आलू-टमाटर, सब्जियां तोड़ ले जाते ही हैं और फ्रिज में उथल-पुथल कर देते हैं. इन्हें अगर भगाया जाता है तो ये झुंड बनाकर हमला करने से भी पीछे नहीं हटते, जिससे लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है. राजपुर जैसे इलाकों में तो दुकानदारों ने सुरक्षा के लिए लोहे के जाल भी लगवाए हैं.
गलियों में चलना दूभर
कुसुम ने बताया कि उनकी छोटी बेटी को बंदरों ने काट लिया था. अब बंदरों के इस हिंसक रूप ने बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है. माता-पिता अपने बच्चों को घर से बाहर खेलने भेजने में डर रहे हैं. कई इलाकों में तो लोग अपने ही घरों में कैद रहने को मजबूर हैं, क्योंकि घर की छतों और बालकनी पर बंदरों का कब्जा रहता है. गलियों में पैदल चलना भी दूभर हो गया है, क्योंकि बंदर राहगीरों के हाथ से सामान छीनने के चक्कर में उन्हें काट लेते हैं.
ऊंट के मुंह में जीरा
बसंती का कहना है कि हमारा खाना-पीना सब दुश्वार हो गया. हम अपनी छत पर और आंगन में खाना नहीं खा सकते हैं. मोथोरावाला, रायपुर, राजपुर और क्लेमेंट टाउन, मोहब्बेवाला में बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग को बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है. बंदरों को पकड़ने के लिए पिंजरे तो लगाए जाते हैं, लेकिन उनकी बढ़ती आबादी के सामने ये प्रयास ऊंट के मुंह में जीरे के समान साबित हो रहे है. जब तक बंदरों के बंध्याकरण और उन्हें सुरक्षित जंगलों में छोड़ने की कोई बड़ी योजना नहीं बनेगी, तब तक इस परेशानी से निजात मिलना नामुमकिन है.
क्या बोलीं नगर आयुक्त
देहरादून की नगर आयुक्त नमामि बंसल ने बताया कि हाल ही में बंदरों को लेकर वन विभाग के साथ समझ में बनाने के लिए दो बैठक की जा चुकी है. वन विभाग के सहयोग से ही बंदरों को पकड़ना, उन्हें शिफ्ट करना जैसे काम किए जाते हैं इसीलिए वन विभाग की गाइडलाइन के अनुरूप ही काम किया जाना है. इसके लिए एक एजेंसी को जिम्मेदारी दी जाएगी ताकि हमारे पास बंदरों को पकड़ने के लिए मैनपावर और व्यवस्थाएं बन सकें.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें
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