Himachali Kalgi Toopi: देहरादून में आयोजित वूल एक्सपो में हिमाचली कलगी टोपी ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है. यह टोपी सिर्फ सिर ढकने का माध्यम नहीं, बल्कि पहाड़ी संस्कृति और शिल्प कला का प्रतीक भी है. जुबिन नौटियाल और पवनदीप राजन जैसे कलाकारों द्वारा इसे पहने जाने के बाद युवाओं में इसका क्रेज तेजी से बढ़ा है.
क्यों खास है ‘कलगी वाली टोपी’?
देहरादून में आयोजित हो रहे ‘वूल एक्सपो’ में इन दिनों पहाड़ी संस्कृति और फैशन का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है. प्रदर्शनी में यूं तो कई उत्पाद मौजूद हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा ‘कलगी वाली हिमाचली टोपी’ की हो रही है, लेकिन इस तरह की पहाड़ी टोपी को अक्सर उत्तराखंड के गौरव और मशहूर गायक जुबिन नौटियाल और पवनदीप राजन के सिर की शोभा बढ़ाते हुए देखा गया है.
हिमाचल प्रदेश के हैप्पी ने बताया कि उत्तराखंड की तरह ही हिमाचल के विशेष पहनावे में पुरुषों के सिर पर टोपियां भी पहनें देखा होगा. इनका बहुत महत्व है,इसमें लगी ‘कलगी’ (एक विशेष प्रकार का ब्रूच या पंख नुमा डिजाइन) इसे राजसी लुक देती है. यह टोपियां उत्तम दर्जे के ऊन से तैयार की जाती हैं, जो कड़ाके की ठंड में भी सिर को गर्म रखती हैं. टोपी की पट्टी पर की गई बारीक बुनाई और पारंपरिक ‘कुल्लू’ बॉर्डर के डिजाइन इसकी पहचान हैं. इनमें मरून, हरा और ग्रे जैसे क्लासिक रंगों के साथ-साथ अब यह आधुनिक रंगों में भी उनके पास उपलब्ध है. उन्होंने बताया पुराने समय में टोपी के ऊपर मोर का पंख की कलगी को लगाया जाता था लेकिन इस पर रोक लगा दी गई थी इसलिए हम आर्टिफिशियल कलगी तैयार करते हैं. यह सोने या चांदी से भी तैयार करवाई जा सकती है. यहां टोपियां डेढ़ सौ रुपए की कीमत से शुरू होती है.
फैशन स्टेटमेंट के तौर युवाओं को भा रही पहाड़ी टोपियां
एक्सपो में हिमाचल की इन खास टोपियों की मौजूदगी से न केवल व्यापार बढ़ रहा है, बल्कि अंतर-राज्यीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी हो रहा है. देहरादून की कड़ाके की ठंड के बीच लोग न केवल इसे फैशन स्टेटमेंट के तौर पर खरीद रहे हैं, बल्कि उपहार देने के लिए भी यह पहली पसंद बनी हुई है.
खरीददार सोनू ने बताया कि “हमने जुबिन नौटियाल को कई बार लाइव शो में यह पहाड़ी टोपी पहने देखा है. यह देखने में बहुत ही भव्य लगती है और इसे पहनकर एक अलग ही पहाड़ी जुड़ाव महसूस होता है.पहाड़ी टोपी का यह बढ़ता चलन हमारी पारंपरिक वेशभूषा के पुनरुद्धार का संकेत है. देहरादून वूल एक्सपो में कलगी वाली टोपी की यह चमक बताती है कि आधुनिकता के दौर में भी अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़ाव सबसे ऊपर है.
About the Author
सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.