Eco Friendly Home Decor Items: राजधानी देहरादून के दुर्गाचरण ने अपनी कला के दम पर ‘कचरे से कंचन’ बनाने की कहावत को सच कर दिखाया है. जहां बाजार में लकड़ी के सामान के लिए पेड़ों की कटाई होती है, वहीं दुर्गाचरण नदियों के किनारे मिलने वाली बेकार और पुरानी लकड़ियों को नया जीवन दे रहे हैं. कोरोनाकाल में शौक के तौर पर शुरू हुआ यह सफर आज एक सफल आजीविका बन चुका है. वे नदियों में बहकर आए मलबे और लकड़ियों को तराशकर ऐसे यूनिक लैंप शेड्स और सजावटी सामान तैयार करते हैं, जिनकी डिमांड आज मॉर्डन इंटीरियर डिजाइनिंग में खूब हो रही है. खास बात यह है कि इस नायाब कला के लिए न तो जंगलों को नुकसान पहुंचता है और न ही प्रकृति को.
क्या है ‘ड्रिफ्टवुड’ और कैसे शुरू हुआ कचरे से कंचन तक का सफर
दुर्गाचरण पहले एक निजी कंपनी में काम करते थे. बचपन से ही उन्हें आर्ट और हैंडीक्राफ्ट्स का शौक था, लेकिन उनकी इस कला को नई पहचान मिली कोरोनाकाल के दौरान. तब उन्होंने अपने घर के लिए कुछ सजावटी चीजें बनाईं जो लोगों को इतनी पसंद आईं कि उन्हें इसी क्षेत्र में काम करने का हौसला मिला. दुर्गाचरण को ट्रैकिंग का शौक हैं और नदियों के किनारे घूमते हुए वे ‘ड्रिफ्टवुड’ इकट्ठा करते हैं. दरअसल ड्रिफ्टवुड उन लकड़ियों को कहते हैं जो पहाड़ों से नदी में बहकर आती हैं. सालों तक पानी और पत्थरों के बीच रगड़ खाकर ये लकड़ियां कुदरती तौर पर अजीब और सुंदर आकार ले लेती हैं. जिन्हें लोग अक्सर बेकार मलबा समझकर छोड़ देते हैं, दुर्गाचरण ने उसी में अपनी कला का भविष्य ढूंढ लिया है.
दुर्गाचरण की कला का जादू, बेजान लकड़ियों में आ जाती है नई जान
दुर्गाचरण की कला की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे इन बेजान लकड़ियों की प्राकृतिक बनावट से बिल्कुल भी छेड़छाड़ नहीं करते हैं. वे इन लकड़ियों को इस तरह तराशते हैं कि उनकी कुदरती खूबसूरती बनी रहे. वे इन लकड़ियों से सुंदर लैंप शेड्स, फ्लावर पॉट्स और दीवारों पर सजाने वाली शानदार लाइटें और कलाकृतियां तैयार करते हैं. वे लकड़ी के प्राकृतिक छेदों और उसके टेक्सचर का इस्तेमाल रोशनी के खेल के लिए करते हैं, जिसे आज के समय में घरों के इंटीरियर डिजाइन के लिए बहुत पसंद किया जा रहा है.
तोरई के झूने से बने यूनिक लैंप
दुर्गाचरण केवल लकड़ियों तक ही सीमित नहीं हैं, वे तोरई के सूखे हुए रेशों (झूने) से भी बेहद आकर्षक लैंप तैयार कर रहे हैं जो देखने में काफी अलग और सुंदर लगते हैं. पिछले 5 वर्षों से वे लगातार इस काम को कर रहे हैं और बाजार में उन्हें लोगों का काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है. दुर्गाचरण की यह मेहनत साबित करती है कि अगर इंसान के पास पारखी नजर और हुनर हो, तो वह बेकार समझी जाने वाली चीजों से भी बेहतरीन और कीमती सामान तैयार कर सकता है.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें
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