dausa News : बांदीकुई में गाड़िया लोहार समाज की बेटी आरती की शादी सड़क किनारे टेंट लगाकर हुई. दूल्हा सोनू डिवाइडर पर बैठा था. परिवार ने स्थायी आवास और रोजगार की मांग की. स्थानीय लोगों ने मदद की. यह शादी उपखंड कार्यालय के सामने सड़क किनारे टेंट लगाकर कराई गई. टेंट के नीचे शादी की सारी तैयारियां की गईं और आसपास से गुजर रहे लोग भी इस अनोखी और भावुक तस्वीर के गवाह बने.
यह शादी उपखंड कार्यालय के सामने सड़क किनारे टेंट लगाकर कराई गई. टेंट के नीचे शादी की सारी तैयारियां की गईं और आसपास से गुजर रहे लोग भी इस अनोखी और भावुक तस्वीर के गवाह बने. दूल्हा सोनू शेरवानी पहनकर सड़क के डिवाइडर पर बैठा नजर आया, जबकि दुल्हन आरती टेंट के अंदर सजी-धजी बैठी थी. डीजे की धुन पर बाराती पहुंचे और पंडित के मंत्रोच्चार के साथ सात फेरे भी सड़क किनारे ही पूरे किए गए.
सड़क किनारे बना शादी का मंडप
इस शादी की सबसे खास और भावुक तस्वीर यह रही कि जहां आमतौर पर शादियां बड़े-बड़े गार्डन और घरों में होती हैं, वहीं इस परिवार को सड़क किनारे ही टेंट लगाकर बेटी का विवाह करना पड़ा. उपखंड कार्यालय के सामने सड़क किनारे टेंट लगाकर पूरे विधि-विधान के साथ विवाह की रस्में निभाई गईं. दूल्हा सोनू सड़क के डिवाइडर पर बैठा रहा और टेंट के भीतर दुल्हन आरती शादी की रस्मों के लिए तैयार बैठी थी. बारात के पहुंचते ही डीजे की धुन पर नाच-गाना हुआ और फिर पंडित के मंत्रोच्चार के साथ सात फेरे कराए गए. यह दृश्य वहां मौजूद लोगों को भावुक भी कर गया और कई लोगों को सोचने पर मजबूर कर गया कि आज भी कुछ परिवारों को ऐसी परिस्थितियों में अपनी बेटियों की शादी करनी पड़ रही है.
विदाई के समय भावुक हुआ माहौल
जब विदाई का समय आया तो माहौल बेहद भावुक हो गया. परिवारजनों की आंखों से आंसू छलक पड़े और हर कोई इस पल को देखकर भावुक नजर आया. परिवार के लोगों ने प्रशासन और सरकार से अपील की कि किसी अन्य बेटी को सड़क से विदा नहीं होना पड़े. उन्होंने मांग की कि घुमंतू समाज को स्थायी आवास और रोजगार की सुविधा उपलब्ध कराई जाए ताकि उन्हें ऐसी मजबूरियों का सामना न करना पड़े. जानकारी के अनुसार बांदीकुई निवासी आरती का विवाह लालसोट निवासी सोनू के साथ हुआ. दूल्हे सोनू ने भी कहा कि अगर ससुराल में मकान होता तो शादी सड़क पर नहीं करनी पड़ती. हर परिवार की तरह उनकी भी इच्छा थी कि शादी घर या किसी व्यवस्थित स्थान पर हो, लेकिन मजबूरी में सड़क को ही शादी का मंडप बनाना पड़ा.
स्थायी आवास की मांग उठी
दुल्हन की बहन ने भी प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मदद नहीं मिलने पर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि कई बार अपनी समस्या बताने के बावजूद आज तक उन्हें स्थायी आवास या भूखंड उपलब्ध नहीं कराया गया. हालांकि इस दौरान बाजार के व्यापारियों और स्थानीय ग्रामीणों ने आगे आकर सहयोग किया. कई लोगों ने कन्यादान कर बेटी को आशीर्वाद दिया और इस परिवार की मदद की. गाड़िया लोहार समाज के कई परिवार आज भी सड़क किनारे जीवन यापन करने को मजबूर हैं. स्थायी आवास या भूखंड नहीं मिलने के कारण उन्हें शादी-ब्याह जैसे सामाजिक कार्यक्रम भी सड़क पर ही आयोजित करने पड़ते हैं. यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि घुमंतू समाज के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए क्यों संघर्ष कर रहे हैं. समाज के लोगों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि गाड़िया लोहार समाज के परिवारों को स्थायी आवास, भूखंड और रोजगार की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए ताकि उन्हें ऐसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े.
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नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
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