‘धमाका होता है तो लगता है भूकंप आ गया…पूरा घर हिल जाता है, बच्चे डर से रोने लगते हैं, बीमार पड़ रहे हैं, हमारी कोई नहीं सुन रहा।’
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के जावंगा गांव के रहने वाले गौतम राम मंडावी की आवाज में डर और गुस्सा दोनों साफ झलकता है। वे बताते हैं, ‘हमारे 2 एकड़ खेत में पत्थर फेंक दिए गए। मवेशियों को चोट लगी है। कई बार मना किया, कलेक्टर तक शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।’
जगदलपुर-बीजापुर नेशनल हाईवे-63 से महज 100-150 मीटर दूर संचालित लक्ष्मी मेटल एंड इंडस्ट्रीज के क्रशर प्लांट की लगातार हो रही ब्लास्टिंग ने गांव में दहशत है। ग्रामीणों के मुताबिक 20 से 25 मकानों में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं, कई कच्चे घर ढह गए हैं और स्कूल तक सुरक्षित नहीं है।
दैनिक भास्कर डिजिटल की टीम जगदलपुर संभागीय मुख्यालय से करीब 80 से 90 किमी दूर जावंगा गांव पहुंची। इस गांव में करीब 5 से 6 पारा है। जगदलपुर-बीजापुर नेशनल हाईवे के किनारे ही क्रशर प्लांट है। इस प्लांट के ठीक पीछे स्कूल पारा है। ब्लास्टिंग से यही पारा सबसे ज्यादा प्रभावित है। इस पारा में करीब 40 से 45 घर हैं।
दरअसल, यह पत्थर क्रशर प्लांट करीब 8 साल पहले शुरू हुआ था। ग्रामीण प्लांट में हो रही ब्लास्टिंग से परेशान थे, लेकिन 19 फरवरी 2026 की शाम करीब 4 बजे की ब्लास्टिंग से पानी सिर से ऊपर चले गया। उस दिन 50 किलो से अधिक वजनी पत्थर 200 से 300 मीटर दूर तक जा गिरे।
एक बड़ा पत्थर नवीन प्राथमिक शाला कोसापारा बड़े पनेड़ा की कंक्रीट छत तोड़ते हुए कक्षा के अंदर गिरा। गनीमत रही कि उस समय स्कूल में छात्र-शिक्षक मौजूद नहीं थे, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।
प्रशासन हरकत में आया। कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव के निर्देश पर SDM, तहसीलदार, माइनिंग टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। जगदलपुर से पर्यावरण विभाग की टीम भी स्थल पर पहुंची। खदान क्षेत्र का सीमांकन कराया गया, जांच जारी है। फिलहाल, क्रशर प्लांट बंद करा दिया गया है। लेकिन ग्रामीणों ने प्लांट को पूरी तरह से बंद करने की मांग की है।
इस रिपोर्ट में पढ़िए ग्रामीण किन-किन परेशानियों का सामना कर रहे हैं। प्लांट संचालन और ब्लास्टिंग के क्या नियम हैं? इस मामले में प्रशासन क्या कार्रवाई कर रहा है…
पहले देखिए ये तस्वीरें…
ब्लास्टिंग से 20 से 25 मकानों में गहरी दरारें पड़ चुकी है।

ग्रामीण ने बताया- उनका एक कच्चा मकान ढह गया।

गांव वालों ने बताया कि नए मकान में भी दरारें पड़ रही है।

19 फरवरी को ब्लास्टिंग के बाद एक पत्थर स्कूल पर गिरा था।
ब्लास्टिंग के समय धरती हिलती है- ग्रामीण
ब्लास्टिंग के समय धरती तक हिल जाती है, जिससे दीवारों में कंपन होता है और धीरे-धीरे दरारें चौड़ी होती जा रही हैं। कई कच्ची झोपड़ी भी ढह गई है। ग्रामीणों का कहना है कि सबसे ज्यादा असर स्कूल भवन पर पड़ रहा है। जिस स्थान पर ब्लास्टिंग की जा रही है, वहीं पास में स्कूल है। धमाके के दौरान कक्षाओं की दीवारें हिलती महसूस होती हैं।
बच्चे सहम जाते हैं और पढ़ाई का माहौल बाधित होता है। महिलाओं ने बताया कि अचानक तेज धमाका होने से बच्चे डर की वजह से रोने लगते हैं। कई बार ऐसा भी हुआ है कि धमाके के बाद डर की वजह से बच्चों की तबीयत भी बिगड़ी है।
गौतम राम मंडावी ने बताया कि ब्लास्ट से ऐसा लगता है मानों की भूकंप सा झटका लगा हो। घरों में नुकसान हो रहा है। हम काफी परेशान हो चुके हैं। हमारे करीब 2 एकड़ से ज्यादा खेतों में पत्थरों के टुकड़ों को डंप कर दिया गया है। जिससे खेत में भी नुकसान हुआ है।

शांति मंडावी ने बताया कि क्रशर प्लांट में ब्लास्ट करते हैं तो पूरा घर हिल जाता है। झटका ऐसा होता है कि लाइटें भी गुल हो जाती है। बच्चे डरते हैं। डर की वजह से अंदर घुस जाते हैं। उन्हें बाहर निकालना मुश्किल हो जाता है। इससे उनकी मानसिक स्थिति पर भी काफी प्रभाव पड़ता है।

‘ढाबे पर गिरते हैं पत्थर’
क्रशर प्लांट के ठीक सामने मुख्य सड़क किनारे एक ढाबा संचालित है। ढाबा संचालक और कर्मचारियों का कहना है कि, जब ब्लास्टिंग होती है तो पत्थरों के टुकड़े उड़कर सड़क पार तक आ जाते हैं। कई बार पत्थर ढाबे की छत और परिसर में गिरे हैं।
ढाबे में काम करने वाले लोगों और वहां भोजन करने आए ग्राहकों को भी चोट लग चुकी है। हालांकि, गंभीर हादसा अब तक नहीं हुआ, लेकिन हर ब्लास्टिंग के समय दहशत का माहौल बन जाता है।

पत्थर क्रशर प्लांट करीब 8 साल पहले शुरू हुआ था।
बस पर गिरे पत्थर, कांच टूटा
एक बस ऑपरेटर ने बताया कि, कुछ दिन पहले ब्लास्टिंग के दौरान उनकी आखिरी बस गीदम से जगदलपुर की तरफ जा रही थी। बस में यात्री सवार थे। उसी समय पत्थरों के टुकड़े बस पर आकर गिरे, जिससे बस के शीशे टूट गए। गनीमत रही कि उस समय कोई यात्री घायल नहीं हुआ, लेकिन घटना के बाद चालक और यात्रियों में दहशत थी।
ग्रामीणों का कहना है कि कुछ दिन पहले हुई एक ब्लास्टिंग में पत्थर करीब 300 मीटर दूर तक गिरे थे। इससे खेतों में काम कर रहे किसानों और मवेशियों की जान को भी खतरा बना रहता है।

प्रशासन से गुहार, नहीं हुई सुनवाई
गांव के सरपंच समेत अन्य ग्रामीण कई बार प्रशासन से शिकायत कर चुके हैं। ब्लास्टिंग रोकने या प्लांट को आबादी और स्कूल से दूर शिफ्ट करने की मांग की गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक न तो सर्वे हुआ और न ही किसी तरह का मुआवजा मिला है।
किसानों का कहना है कि वे मजदूरी और खेती पर निर्भर हैं। जिनके मकान ज्यादा क्षतिग्रस्त हुए, उन्होंने दूसरी झोपड़ी बनानी शुरू की, लेकिन दोबारा ब्लास्टिंग से वह भी प्रभावित हो गई।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करेंगे। उनका कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन गांव, स्कूल और सड़क से सटे इलाके में इस तरह की ब्लास्टिंग से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
सरपंच बोले- निष्पक्ष जांच करें टीम
जावंगा गांव के सरपंच बोमड़ा राम कवासी का कहना है कि, क्रशर प्लांट की वजह से हमें नुकसान हो रहा है। दिसंबर 2025 में हमने प्रशासन से इसकी शिकायत भी की थी। हमें आशंका है कि संचालक ज्यादा बारूद डालकर विस्फोट करते हैं। हमने कई बार उन्हें समझाया भी था। करीब 10 से 12 पूरे गांव के लोग संचालक के पास पहुंचे थे। प्रशासन भी नहीं सुना।

अब जानिए 19 फरवरी को क्या हुआ था
पुलिस के अनुसार 18 फरवरी को थाना से ब्लास्टिंग के लिए बारूद लिया गया था, लेकिन दिन और समय की सूचना नहीं दी गई। 19 फरवरी की शाम करीब 4 बजे ब्लास्टिंग कर दी गई। ब्लास्टिंग के दौरान 50 किलो से अधिक वजनी पत्थर 200 से 300 मीटर दूर तक जा गिरे।
एक बड़ा पत्थर नवीन प्राथमिक शाला कोसापारा बड़े पनेड़ा की कंक्रीट छत तोड़ते हुए कक्षा में गिरा। उस समय स्कूल में छात्र-शिक्षक मौजूद नहीं थे, जिससे बड़ा हादसा टल गया। ढाबा और करीब 200 मीटर दूर स्थित सीआरपीएफ कैंप परिसर के पास भी पत्थर गिरे।

एक बड़ा पत्थर नवीन प्राथमिक शाला कोसापारा बड़े पनेड़ा की कंक्रीट छत तोड़ते हुए कक्षा के अंदर गिरा।

यही वो पत्थर पर है, जो स्कूल के अंदर गिरा था।
प्लांट स्थल का सीमांकन कराया गया
इसके बाद प्रशासन भी हरकत में आया। गीदम एसडीएम मनीष बघेल, तहसीलदार महेश कश्यप, आरआई चित्रसेन निराला तथा पटवारी बृषभूषण देशमुख, ओम कश्यप और बृजेश उसेंडी मौके पर पहुंचे। प्लांट स्थल का सीमांकन कराया गया।
साथ ही माइनिंग विभाग की टीम ने भी स्थल का निरीक्षण कर दस्तावेज और सुरक्षा मानकों की जांच शुरू की। जगदलपुर से इंवॉयर्मेंट की टीम से साइंटिस्ट घनश्याम सिंग समेत अन्य अधिकारी पहुंचे। प्रारंभिक जांच में प्लांट संचालन में लापरवाही सामने आई है।

एसडीएम, तहसीलदार, माइनिंग टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की।
चार लोगों के नाम सामने, दो जेल भेजे गए
गीदम पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। जांच में संचालक टी. रमेश, मैनेजर इजराइल, ब्लास्टर टी. रमेश, असिस्टेंट ब्लास्टर रामबाबू के नाम सामने आए। ब्लास्टर टी. रमेश, असिस्टेंट ब्लास्टर रामबाबू पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 288, 324(5), 326(7) और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 3 के तहत मामला दर्ज किया गया।
दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया। वहां से 15 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। संचालक और मैनेजर फरार बताए जा रहे हैं।
जांच पूरी होने तक प्लांट बंद
एसडीएम मनीष बघेल ने संचालक को नोटिस जारी किया। जांच पूरी होने तक प्लांट बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। संयुक्त जांच टीम रिपोर्ट तैयार कर रही है।
ब्लास्टिंग के नियम
- ब्लास्टिंग से पहले संबंधित थाने को लिखित सूचना देना अनिवार्य।
- सर्फेस क्लीनिंग जरूरी, ताकि ढीले पत्थर दूर न उछलें।
- निर्धारित मात्रा से अधिक विस्फोटक का उपयोग प्रतिबंधित।
- सुरक्षा के लिए फेंसिंग और चेतावनी बोर्ड लगाना अनिवार्य।
- स्कूल, कैंप, ढाबा जैसे संवेदनशील स्थानों के पास अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था जरूरी।
- ब्लास्टिंग के समय क्षेत्र खाली कराना और मार्ग बंद करना अनिवार्य।
कितना नुकसान हुआ, जांच करवाएंगे- कलेक्टर
दंतेवाड़ा कलेक्टर देवेश ध्रुव ने कहा कि हाल ही में जो मामला सामने आया है उसके संबंध में हमने जांच करवाई है। तहसील और माइनिंग की टीम मौके पर पहुंची थी। FIR भी दर्ज हुई है। वहीं ब्लास्टिंग की वजह से गांव में कितना नुकसान हुआ है इसका पता लगाने अब दूसरे राउंड में टीम को हम गांव भी भेजेंगे।
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प्लांट एरिया की फोटो।
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के जावांगा में स्थित क्रशर प्लांट में अचानक ब्लास्ट कर दिया गया। जिससे पत्थरों के टुकड़े करीब 200-300 मीटर दूर स्कूल, ढाबा और CRPF कैंप के नजदीक जा गिरे। 50 किलो से ज्यादा वजन का पत्थर स्कूल की छत तोड़कर नीचे क्लास रूम में गिर गया। हालांकि कोई जनहानि नहीं हुई। पढ़ें पूरी खबर…
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