Chhattisgarh rare folk art: छत्तीसगढ़ में सुवा नृत्य का अपना ही क्रेज है. इसमें प्रकृति, प्रेम और लोककथाएं गीतों व नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत होती हैं. यह बेहद पुरानी लोककला है. इसकी प्रस्तुति बेहद शानदार होती है.
सुवा नृत्य छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध लोकनृत्य परंपरा है, जिसे जांजगीर चांपा जिले में आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं और युक्तियों में द्वारा समूह बनाकर दीपावली के बाद शाम के समय यह नृत्य करती हैं. इस नृत्य में महिलाएं बीच में बांस टोकरी में तोते (मिट्टी या लकड़ी से बने सुवा) के प्रतीक रूप में रखकर उसके गोल घुमकर नृत्य करते हुए गीत गाकर प्रकृति, प्रेम और लोककथाओं का प्रदर्शन करती हैं. सुहावने गीत और तालबद्ध नृत्य इसकी खास पहचान है. बीच में रखे यह सुवा प्रकृति, प्रेम, सौभाग्य और शुभता का प्रतीक माना जाता है.
बेहद मनमोहक होती कला
जिले के पामगढ़ विधानसभा सभा अंतर्गत पैसर महिलाएं और बालिकाओं ने बताया की पिछले 15 से 20 वर्षों से सुवा नृत्य कर रही हैं और आस-पास के गांवों में भी अपनी प्रस्तुति देती हैं, वही सुवा नृत्य कर रही युवती सीता ने बताया कि सुवा नृत्य के लिए उनके समूह में कुल 12 बालिका और 14 महिलाएं 3 सहयोगी वरिष्ठ कलाकार का समावेश जो अपने मांदर, मंजीरा की धुन से सुवा नृत्य गाना को मनमोहक बनाते है, और सुवा (मिट्टी या लकड़ी से बने तोते) के प्रतीक रूप में रखकर उसके गोल घूमते हुए नृत्य करते हुए गीत गाते है.
और प्रकृति प्रेम और लोककथाओं का प्रदर्शन करते हैं, इसके बदलें में घर वाले खुशी से अपनी नई फसल का अन्न प्रसाद के रूप ने सुवा के टोकरी में चढ़ाती है. और कहा कि सुवा नृत्य के माध्यम से आगे बढ़कर पूरे छत्तीसगढ़ में अपनी पहचान बनाना चाहती है अपनी गांव से लेकर आसपास के क्षेत्रों में यह समूह अपने आकर्षक नृत्य और पारंपरिक गीतों के माध्यम से लोगों का मन मोह लेता है, वही समूह की महिलाओं का कहना है कि वे छत्तीसगढ़ की परंपरा सुवा नृत्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना चाहती हैं और छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को हर मंच पर पहचान दिलाना चाहती हैं.गांव के लोग भी इन बालिकाओं के उत्साह और लगन की सराहना करते हुए उनका सहयोग कर रहे हैं.
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7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें
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