कुछ दिनों बाद आरोपी ने उज्जैन के किसी कथित महाराज और साधु की हत्या जैसी झूठी कहानियां गढ़कर प्राचार्य को और भयभीत किया। बदनामी और कार्रवाई के डर से प्राचार्य ने ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, नकद भुगतान और गोल्ड लोन के माध्यम से आरोपी को कुल 1 करोड़ 4 लाख रुपये दे दिए। जब प्राचार्य को अपने साथ हुई ठगी का अहसास हुआ, तो उन्होंने तुरंत कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी है।
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एसडीओपी जितेंद्र पाठक के अनुसार आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि यह अंधविश्वास, भय और विश्वास का दुरुपयोग कर रची गई सुनियोजित साजिश थी।
इस घटना ने पूरे शहर में चर्चा का विषय बना दिया है कि कैसे शिक्षित और जिम्मेदार पद पर आसीन व्यक्ति भी डर और लालच के जाल में फंसकर करोड़ों रुपये गंवा सकता है।
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