रंगों के इस मौसम में जहां पूरा शहर फाग के रंग में डूबा है, वहीं स्वाद की दुनिया में भी एक अनोखी हलचल देखने को मिल रही है। भुजिया की खुशबू से पहचाने जाने वाले बीकानेर में इस बार होली पर भंग भुजिया ने खास जगह बना ली है। शिव के प्रसाद मानी जाने वाली भांग और कुरकुरी भुजिया का यह संगम लोगों को त्योहार की मस्ती का नया अनुभव दे रहा है।
भुजिया नगरी में हरे स्वाद की एंट्री
बीकानेर की पहचान उसकी नमकीन से है। सालभर यहां 40 से ज्यादा किस्म की भुजिया तैयार होती है, लेकिन होली के दिनों में एक खास वैरायटी बाजार पर छा जाती है भंग वाली भुजिया। आकार में सामान्य से थोड़ी मोटी और स्वाद में अलग, यह भुजिया त्योहार की मांग को देखते हुए सीमित समय के लिए बनाई जाती है। दुकानदारों का कहना है कि जैसे-जैसे होली नजदीक आती है, इस खास भुजिया की बिक्री बढ़ जाती है। इसकी कीमत 300 से 350 रुपये प्रति किलो तक है, लेकिन शौकीनों के उत्साह में कोई कमी नहीं है।
सिर्फ नमकीन नहीं, मिठाइयों में भी खुमारी
होली की मिठास भी इस बार अलग अंदाज में नजर आ रही है। बाजार में भंग की गुलाबजामुन, मोतीपाक, दिलखुशाल, रबड़ी, आइसक्रीम, कचौड़ी और पकोड़े जैसे कई आइटम तैयार किए जा रहे हैं। युवा वर्ग इन नए प्रयोगों को लेकर खासा उत्साहित है, वहीं पुराने ग्राहक इसे परंपरा का नया रूप मान रहे हैं।
रंग, रस और जिम्मेदारी का संदेश
हालांकि दुकानदार ग्राहकों को यह भी सलाह दे रहे हैं कि भंग मिश्रित खाद्य पदार्थों का सेवन संयम से करें। त्योहार की मस्ती तभी तक अच्छी है, जब तक वह आनंद और सौहार्द बनाए रखे।
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परंपरा और प्रयोग का अनोखा संगम
बीकानेर की होली हमेशा से अपने अलग अंदाज के लिए जानी जाती है। इस बार रंगों के साथ स्वाद में भी भांग का हरा रंग घुल गया है। चंग की थाप, उड़ता गुलाल और हाथ में भंग भुजिया यह नजारा शहर की फिजा में एक अलग ही उमंग घोल रहा है। होली पर बीकानेर सिर्फ रंगों से नहीं, बल्कि स्वाद की इस अनोखी पहल से भी सराबोर नजर आ रहा है। यहां हर कुरकुरी भुजिया में इस बार त्योहार की खुमारी साफ महसूस की जा सकती है।
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