दुर्ग में आयोजित हुए स्कूल नेशनल कबड्डी प्रतियोगिता में विवाद हो गया। राजस्थान की टीम प्रतियोगिता से एक दिन पहले ही लौट गई। क्लोजिंग सेरेमनी में भी शामिल नहीं हुई। विवाद की वजह राजस्थान की टीम के प्रोटेस्ट को बताया जा रहा है। राजस्थान की टीम ने आरोप
राजस्थान की टीम ने लिखित में शिकायत की है, लेकिन इसके बाद भी न तो उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई हुई और न ही खिलाड़ियों के आधार और पहचान पत्र की जांच की गई। उलटा छत्तीसगढ़ की ऑफिशियल ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। नतीजा ये हुआ कि राजस्थान की टीम क्लोजिंग सेरेमनी में भी शामिल नहीं हुई और रात में ही राजस्थान लौट गई। बता दें कि दुर्ग में 6 से 9 जनवरी तक कबड्डी अंडर-14 बालक वर्ग स्कूल नेशनल खेल का आयोजन किया गया। इसमें छत्तीसगढ़ की टीम ने विजेता का खिताब अपने नाम किया है।
स्कूल फेडरेशन ऑफ इंडिया से लिखित में शिकायत इस पूरे विवाद के बाद दैनिक भास्कर डिजिटल ने राजस्थान के कबड्डी कोच से बात की तो उन्होंने बताया कि हमारा जो प्लेटफॉर्म था एसजीएफआई का वहां पर हमने अपनी बात रख दी है। हमने रिटर्न में उन्हें अपनी शिकायत दी है। हालांकि हमारी कोई सुनवाई नहीं हुई है। कमेटी ने हमसे पैसे भी डिपॉजिट करवा लिए और रिसिविंग तक नहीं दी। अब उनको जो भी निर्णय होगा। हम आ गए हैं, और ट्रेन में हैं। छत्तीसगढ़ के ऑफिशियल हमें कुछ भी ऑन रिकॉर्ड देने को तैयार नहीं थे। हमारी जो भी मर्यादा थी वहां तक हमने अपनी बात रख दी है। आगे कुछ भी नहीं कर सकते हैं।
ओवरएज खिलाड़ी के सबूत भी दिखाए राजस्थान कबड्डी टीम के जनरल मैनेजर ने दैनिक भास्कर डिजिटल को बताया कि हमने प्रोटेस्ट किया था। प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ की टीम में ओवरएज खिलाड़ी शामिल थे। हमने आपत्ति जताई और खिलाड़ियों के आधार कार्ड और पहचान पत्र मांगे, जो कि हर खिलाड़ी के पास होना चाहिए। लेकिन उन्होंने हमें नहीं दिखाया। हमारे पास कुछ खिलाड़ियों के ओवरएज होने के सबूत भी थे। हमने उनको प्रूफ भी दिखाया कि एक बच्चे की जन्मतिथि 2002 की थी और वो हरियाणा फेडरेशन कप खेला हुआ था। इसके बाद भी हमारी नहीं सुनी। शिकायत की रीसिविंग तक नहीं दी। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ विवाद राजस्थान और छत्तीसगढ़ के ऑफिशियल के बीच हुआ विवाद सोशल मीडिया पर वायरल है। कई वीडियो में ये तक लिखा है कि छत्तीसगढ़ की टीम ने फ्रॉड कर मैच जीता है। राजस्थान के ऑफिशियल ने कहा कि हमारे साथ फ्रॉड हुआ है। अंडर-14 का टूर्नामेंट था, लेकिन इसमें ज्यादा उम्र के खिलाड़ियों को खिलाया जा रहा था। जब हमने आधार कार्ड मांगा तो वो भी नहीं दिखाया। अपील की थी, लेकिन हमारी कोई सुनवाई नहीं हुई। शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। मैच के दौरान भी ऑफिशियल गलत डिसिजन दे रहे थे।
जिम्मेदारों ने एक दूसरे पर डाली जवाबदेही
दोनों टीमों के बीच हुए इस विवाद को सुलझाने की जिम्मेदारी स्कूल फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजीएफआई) के ऑब्जर्वर और दुर्ग संभाग के संयोजक की थी। इस मामले में एसजीएफआई के ऑब्जर्वर ने कहा कि आप मैडम से बात कीजिए, मैडम ही कमेटी की चेयरमैन है, कल्पना स्वामी मैडम। मुझे लेटर नहीं मिला है। मैडम को ही मिला है। मैडम ने ही अपनी कमेटी में इसे रखा, आप उनसे ही बात कीजिए। प्रोटेस्ट मेरे नॉलेज में है। लेकिन इसका पूरा निर्णय मैडम ही लेगी। कमेटी ही इसकी जांच करेगी और फैसला लेगी। इधर कमेटी की चेयरमैन कल्पना स्वामी ने कहा कि राजस्थान की टीम ने प्रोटेस्ट किया था। हम लोगों ने कमेटी भी बनाई थी। सब कुछ हो गया। उस टीम को आना चाहिए था, लेकिन टीम तो क्लोजिंग सेरेमनी में भी नहीं आई। वो तो पहले ही चले गई। ऐसी कोई टीम थोड़े ही जाती है। टूर्नामेंट होता है तो कैसे एक दिन पहले ही चले जाओगे। उनकी गलती है उनको जाना ही नहीं चाहिए। प्रोटेस्ट के संबंध में क्या हुआ है मुझे पता नहीं है मैं वहां पर नहीं थी, मैं पूछती हूं मेरी कमेटी से फिर बताती हूं।
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