थलू से धरोट तक छह किमी ट्रैक बिछाने का काम लटका
ग्रामीण कंपनी से कर रहे हैं पत्थरों की ढुलाई के लिए ट्रैक्टर लगाने की मांग
कंपनी का तर्क, ट्रैक्टर तकनीक रूप से ब्लास्ट ढुलाई के लिए उपयुक्त नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सामरिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण भानुपल्ली-बिलासपुर रेल लाइन परियोजना एक बार फिर विवादों की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। थलू तक ट्रैक बिछाने का काम सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद, अब अगले चरण में ग्रामीणों के कड़े विरोध के कारण निर्माण कंपनी को हाथ पीछे खींचने पड़े हैं। विवाद का मुख्य कारण ट्रैक पर बिछाए जाने वाले पत्थरों (ब्लास्ट) की ढुलाई के लिए स्थानीय ट्रैक्टरों को लगाने की मांग है।
परियोजना से जुड़े उच्चाधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में रेल लाइन का काम थलू तक पूरा हो चुका है। थलू तक लगभग 8 किलोमीटर का ट्रैक तैयार है, जिसके लिए रेल सुरक्षा आयुक्त का निरीक्षण मार्च या अप्रैल 2026 में प्रस्तावित है। परेशानी थलू से आगे के हिस्से में खड़ी हुई है। थलू से धरोट के बीच लगभग छह किलोमीटर का अगला खंड तैयार किया जाना है, लेकिन स्थानीय अवरोध के कारण कंपनी यहां काम शुरू नहीं कर पा रही है। डोला-धरोट क्षेत्र के ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का दबाव है कि रेलवे ट्रैक पर बिछाए जाने वाले ब्लास्ट की ढुलाई के लिए उनके निजी ट्रैक्टरों का उपयोग किया जाए। ग्रामीणों के इस हस्तक्षेप के कारण ठेकेदार और कंपनी के कर्मचारी साइट पर काम नहीं कर पा रहे हैं। दूसरी ओर निर्माण कंपनी ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है। कंपनी का तर्क है कि रेल ट्रैक के लिए उपयोग होने वाला भारी ब्लास्ट ट्रैक्टरों के जरिए ढोना तकनीकी रूप से सही नहीं है। ट्रैक्टरों के माध्यम से ब्लास्ट की लोडिंग और अनलोडिंग में अत्यधिक समय लगता है, जिससे प्रोजेक्ट की समय सीमा प्रभावित होती है। बताते चलें कि रेल लाइन परियोजना के कार्य में देरी होने से पहले ही इसकी लागत ढाई गुना हो गई है। वहीं निर्माण कार्य में बाधा से परियोजना के निर्माण में और देरी हो रही है। कंपनी थलू से आगे ट्रैक बिछाने का काम नहीं कर पा रही है। अगर काम समय पर शुरू नहीं हुआ तो तय समय में इसे पूरा करना भी मुश्किल होगा।
कोट
मामला ध्यान में अभी आया है। अगर ग्रामीणों की कोई मांग उचित होगी तो उसपर विचार किया जाएगा। वहीं कंपनी प्रबंधन से भी इस बारे में बात की जाएगी। निर्माण कार्य समय पर हो और विकास में कोई बाधा न आए, इसपर प्रशासन संजीदा है। इसको निजी तौर पर देखूंगा।
राहुल कुमार, उपायुक्त बिलासपुर।
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