नगर पालिका परिषद टीकमगढ़ के वार्ड क्रमांक 20 की बिगड़ती सफाई व्यवस्था अब स्थानीय समस्या से आगे बढ़कर प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बन गई है। कांग्रेस पार्षद एवं नपा उपाध्यक्ष श्रीमती सुषमा-संजय नायक ने अपने पद से इस्तीफा देकर न केवल नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि मुख्य नगरपालिका अधिकारी ओमपाल सिंह भदौरिया की कार्यशैली को भी चुनौती दी है।
उन्होंने अपना त्यागपत्र नगर पालिका परिषद और जिला प्रशासन को भेजते हुए कहा है कि जब वार्डवासियों को नियमित कचरा उठाव, नालियों की सफाई और स्वच्छ वातावरण जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हों, तब जनप्रतिनिधि बने रहना केवल औपचारिकता रह जाता है।
जानकारी के अनुसार बीते कई सप्ताह से वार्ड 20 में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। कचरा उठाव अनियमित है, नालियां जाम हैं और कई स्थानों पर गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। नागरिकों द्वारा बार-बार मौखिक और लिखित शिकायतें किए जाने के बावजूद हालात में कोई सुधार नहीं हुआ। मच्छरों के बढ़ते प्रकोप से संक्रामक बीमारियों की आशंका बढ़ गई है, जिससे वार्डवासी चिंतित हैं। श्रीमती नायक ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि संबंधित अधिकारियों से कई बार आग्रह करने के बाद भी कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रही।
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त्यागपत्र उनके पति एवं पार्षद प्रतिनिधि संजय नायक ने नगर पालिका कार्यालय पहुंचकर सीएमओ को सौंपा। इस दौरान उन्होंने प्रशासनिक उदासीनता पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि मूलभूत समस्याओं का समाधान ही नहीं हो पा रहा है, तो ऐसी व्यवस्था पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी कहा कि वे आगे भी जनहित के मुद्दों पर संघर्ष जारी रखेंगे।
आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति पैदा कर दी
इस घटनाक्रम ने नगर पालिका अध्यक्ष अब्दुल गफ्फार पप्पू मलिक और प्रशासन के बीच भी आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति पैदा कर दी है। अध्यक्ष ने कहा कि सफाई कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए छह माह पहले ही टेंडर प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं हुई। यदि उस समय टेंडर जारी कर दिया जाता तो स्थिति इतनी खराब नहीं होती।
जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सबकी नजर
वहीं नेता प्रतिपक्ष अभिषेक रानू खरे ने कहा कि उपाध्यक्ष का इस्तीफा नगर पालिका की कमजोर व्यवस्था का आईना है। यह घटना बताती है कि जनप्रतिनिधियों को भी जनता की समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। फिलहाल जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सबकी नजर है। यह प्रकरण अब केवल सफाई व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि नगर पालिका परिषद की साख और जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बन गया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा स्थानीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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