केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलने और इसके स्वरूप में बदलाव के विरोध में रविवार को रांची में प्रदेश कांग्रेस के सैकड़ों नेता और कार्यकर्ता उपवास पर बैठे। मोरहाबादी मैदान स्थित बापू वाटिका के सामने आयोजित यह कार्यक्रम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश की अध्यक्षता में सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक चला।
पूर्व प्रधानमंत्री की पुण्यतिथि पर आंदोलन का संदेश
उपवास समाप्त होने के बाद मीडिया से बातचीत में केशव महतो कमलेश ने कहा कि कांग्रेस मनरेगा को बचाने के लिए पूरे देश में अभियान चला रही है। उन्होंने बताया कि यह दिन पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि का भी है और इसी अवसर पर कांग्रेस ने गरीबों और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा का संकल्प दोहराया है।
केंद्र सरकार पर मजदूरों के अधिकार कमजोर करने का आरोप
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार मजदूरों के अधिकारों को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि मनरेगा ग्रामीण गरीबों के लिए जीवन रेखा है, लेकिन इसके स्वरूप में बदलाव कर उनकी रोजी-रोटी पर सीधा असर डाला जा रहा है। उनके अनुसार यह केवल योजना में परिवर्तन नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रहार है।
राज्यभर में आंदोलन विस्तार की घोषणा
केशव महतो कमलेश ने कहा कि यह आंदोलन राजधानी तक सीमित नहीं रहेगा। पंचायत, वार्ड, प्रखंड और बूथ स्तर तक कांग्रेस कार्यकर्ता उपवास और जन-जागरण अभियान चलाएंगे। ग्राम प्रधानों और पंचायत प्रतिनिधियों के माध्यम से गांव-गांव तक यह बताया जाएगा कि मनरेगा कमजोर होने से सबसे अधिक नुकसान गरीब, मजदूर और ग्रामीण परिवारों को होगा।
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मीडिया प्रभारी ने भाजपा पर साधा निशाना
प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कहा कि महात्मा गांधी के आदर्शों को मिटाकर गांधी के सपनों का भारत नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा 2047 में विकसित भारत की बात करती है, जबकि उसके शासनकाल में बड़ी आबादी सीमित राशन पर निर्भर हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि मनरेगा से जुड़ा बड़ा घोटाला बाबूलाल मरांडी के शासनकाल में सामने आया था, जिसमें एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को जेल जाना पड़ा था।
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि मनरेगा और मजदूरों के अधिकारों पर कथित हमलों के खिलाफ उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक केंद्र सरकार अपने फैसलों पर पुनर्विचार नहीं करती।
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