धर्मशाला। क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला में स्वास्थ्य सेवाओं के सरकारी दावों की हकीकत बिल्कुल उलट है। अस्पताल प्रशासन की ओर से कहने को तो 450 प्रकार की दवाएं निशुल्क उपलब्ध करवाने का प्रावधान है, लेकिन वर्तमान में 150 से अधिक दवाएं स्टॉक से गायब हैं। आलम यह है कि अस्पताल में गैस की गोली और कैल्शियम जैसी साधारण दवाएं भी नहीं हैं। इससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जीवन रक्षक दवाओं की इस भारी किल्लत ने गरीब मरीजों को निजी मेडिकल स्टोरों के रहमोकरम पर छोड़ दिया है। इसका निजी मेडिकल स्टोर संचालकों को भी सीधा फायदा मिल रहा है। सरकारी अस्पताल में निशुल्क मिलने वाली लीवर की सिरप, बीपी और कोलेस्ट्रॉल की दवाओं के लिए मरीजों को बाहर 160 से 250 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। निजी मेडिकल स्टोरों में गैस की गोली का पत्ता 40 से 250 रुपये, कैल्शियम का पत्ता 70 से 80, कॉलेस्ट्रॉल की दवा का 40 से 60 और लीवर के लिए सिरप के दाम 160 से 200 रुपये तक हैं।
पांच-पांच महीनों से लोग कैल्शियम जैसी साधारण दवा के लिए अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन स्टॉक न होने का हवाला देकर उन्हें लौटा दिया जा रहा है। मरीजों का आरोप है कि डॉक्टर दवा तो लिख देते हैं लेकिन फार्मेसी काउंटर पर पहुंचते ही पता चलता है कि दवा उपलब्ध ही नहीं है। मरीजों को यह कहकर लौटा दिया जाता है कि दवा स्टॉक में नहीं है।
तालमेल का अभाव : डॉक्टरों के पास नहीं स्टॉक लिस्ट
अस्पताल प्रशासन का तर्क है कि यदि कोई दवा उपलब्ध नहीं है तो उसका सॉल्ट या वैकल्पिक दवा मरीज को दी जानी चाहिए। लेकिन वास्तविकता यह है कि डॉक्टरों और फार्मासिस्टों के बीच तालमेल का भारी अभाव है। डॉक्टरों के पास इस बात की कोई सूची मौजूद नहीं होती कि डिस्पेंसरी में वर्तमान में कौन-कौन-सी दवाएं उपलब्ध हैं। नतीजतन डॉक्टर वही दवा लिखते हैं जो स्टॉक में नहीं होती और मरीज को निजी मेडिकल स्टोरों का रुख करना पड़ता है।
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पांच महीने का इंतजार : तीमारदार विवेक ठाकुर ने बताया कि वे अपनी पत्नी के लिए कैल्शियम की दवा लेने पिछले पांच महीनों से चक्कर काट रहे हैं। अस्पताल से दवा न मिलने के कारण अब तक वे हजारों रुपये निजी स्टोरों पर खर्च कर चुके हैं।
दवा नहीं तो बाहर का रास्ता : मरीज अनूप ने बताया कि कोलेस्ट्रॉल की समस्या थी। डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने कुछ दवाएं लिखीं। सरकारी डिस्पेंसरी में पहुंचा तो वह एक भी दवा नहीं मिली। पर्ची पर लिखी सभी दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ीं।
40 एमजी गोली, आधी खा लेना : बीपी के मरीज अमन को 20 एमजी की दवा की जगह 40 एमजी की गोली थमा दी गई और उसे आधा तोड़कर खाने की सलाह दी गई। डॉक्टरों और फार्मासिस्टों का यह शॉर्टकट मरीजों की जान के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
प्रदेश भर में है कैल्शियम की कमी : एमएस
क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला की एमएस डॉ. अनुराधा शर्मा का कहना है कि कुछ दवाओं की कमी है। चिकित्सकों को वैकल्पिक दवाएं देने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही उन्होंने फार्मासिस्टों को सख्त हिदायत दी है कि हर चिकित्सक के पास उपलब्ध दवाओं की सूची रोजाना पहुंचनी चाहिए, ताकि मरीजों को भटकना न पड़े। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कैल्शियम की दवा की किल्लत पूरे प्रदेश में बनी हुई है।
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