पलामू के किसान प्रियरंजन सिंह ने नीलगायों से फसलों को बचाने के लिए चियासीड (सुपर फूड) की खेती कर नई राह दिखाई है. मात्र 1500 रुपये की लागत में एक एकड़ से एक लाख तक का मुनाफा हो रहा है. कम पानी और बिना रखवाली वाली यह खेती अब जिले में बड़े पैमाने पर करने की तैयारी है.
यूट्यूब से सीखी चियासीड की खेती
पलामू जिले के किसान प्रियरंजन सिंह वर्षों से खेती कर रहे हैं. नई-नई तकनीक और फसलों को अपनाने में उनकी खास रुचि रही है. उन्होंने बताया कि चियासीड की खेती का विचार उन्हें यूट्यूब से मिला. जानकारी जुटाने के बाद उन्होंने 1 एकड़ जमीन में चियासीड की खेती शुरू की, जो उनके लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है.
कम लागत, कम मेहनत और ज्यादा मुनाफा
किसान प्रियरंजन सिंह ने लोकल18 को बताया कि चियासीड की खेती में लागत बेहद कम आती है. एक एकड़ में सिर्फ 1 किलो बीज की जरूरत होती है, जिसकी कीमत करीब 1500 रुपये है. इस फसल को ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, केवल एक से दो बार पटवन काफी है. सबसे बड़ी बात यह है कि नीलगाय या अन्य मवेशी इस फसल को नुकसान नहीं पहुंचाते, जिससे रखवाली का झंझट भी खत्म हो जाता है.
उत्पादन और आमदनी
चियासीड की फसल से एक एकड़ में करीब 5 से 6 क्विंटल तक उपज मिल जाती है. बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिलने के कारण किसान को एक एकड़ से एक लाख रुपये से अधिक का मुनाफा हो रहा है. किसान का कहना है कि इतना लाभ धान और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों से संभव नहीं है.
सुपर फाइबर फूड के रूप में बढ़ती मांग
उन्होंने कहा कि चियासीड को सुपर फाइबर फूड कहा जाता है. इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड, कैल्शियम, आयरन और फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है. यह गठिया जैसी बीमारियों में भी लाभकारी माना जाता है, जिससे बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है.
50 एकड़ में खेती की तैयारी
वीर कुंअर सिंह सहकारी समिति से जुड़े किसान पहले भी पिपरमेंट, पामरोजा और लेमन ग्रास की सफल खेती कर चुके हैं. चियासीड की सफलता से उत्साहित होकर अब अगले वर्ष लगभग 50 एकड़ में इसकी खेती करने की योजना बनाई जा रही है. यह प्रयोग पलामू के किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.
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