छिंदवाड़ा के भाजपा जिला अध्यक्ष शेषराव यादव के “पंडितों का काम पूजा-पाठ है” वाले विवादित बयान के बाद सोशल मीडिया में नाराज़गी बढ़ी. बयान वायरल होने पर यादव ने वीडियो जारी कर माफी मांगी. उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी समुदाय को ठेस पहुंचाना नहीं था.
दरअसल, यह मामला उस वक्त सामने आया, जब शेषराव यादव एक साप्ताहिक कार्यक्रम में पाल समाज के लोगों को संबोधित कर रहे थे. इसी दौरान उन्होंने कहा कि “पंडितों का काम पूजा-पाठ और ज्ञान देना है, सत्ता चलाना नहीं.” बयान सामने आते ही इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. इसके बाद विभिन्न संगठनों और सामाजिक समूहों ने इस टिप्पणी को आपत्तिजनक बताते हुए विरोध दर्ज कराया. मामला तेजी से उबाल लेने लगा और दिल्ली से लेकर भोपाल तक प्रतिक्रियाएं पहुंचने लगीं. इसी बयान में शेषराव यादव ने यह भी कहा था कि देश के प्रधानमंत्री और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री दोनों पिछड़े वर्ग से आते हैं और राजनीति में पिछड़े वर्ग की भागीदारी लगातार बढ़ी है. उन्होंने छोटे-छोटे समाजों की राजनीति में मौजूदगी और सत्ता में हिस्सेदारी को लेकर जागरूकता की बात कही थी. हालांकि, पंडित समाज को लेकर की गई टिप्पणी ही विवाद की मुख्य वजह बनी.
वीडियो जारी कर माफी मांगी, बयान पर दे दी सफाई
सोशल मीडिया पर विरोध बढ़ने और राजनीतिक दबाव के बीच शेषराव यादव ने एक वीडियो जारी कर माफी मांगी. उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी समाज या वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था. अगर उनके शब्दों से किसी को आघात पहुंचा है तो वे उसके लिए क्षमा चाहते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि उनका भाषण समाज की भागीदारी और एकजुटता के संदर्भ में था. इस बयान पर विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया भी सामने आई है. विपक्ष ने भाजपा नेता की टिप्पणी को सामाजिक समरसता के खिलाफ बताते हुए कहा कि ऐसे बयान समाज में विभाजन को बढ़ावा देते हैं. विपक्षी नेताओं का कहना है कि सार्वजनिक पद पर बैठे लोगों को भाषा और संवेदनशीलता का विशेष ध्यान रखना चाहिए. प्रदेश भाजपा ने पहले की तरह ही इस बार भी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. हालांकि शेषराव यादव ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी समाज के खिलाफ भेदभाव नहीं करते और भाजपा की विचारधारा सामाजिक समरसता और समानता पर आधारित है.
स्थानीय स्तर पर सामाजिक संतुलन पर होगा असर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के बयान स्थानीय स्तर पर सामाजिक संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं और पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकते हैं. खासकर ऐसे समय में, जब जातीय और सामाजिक मुद्दे राजनीति के केंद्र में बने हुए हैं. इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या नेताओं के सार्वजनिक बयान सामाजिक मर्यादा और संवेदनशीलता के दायरे में दिए जा रहे हैं. साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि राजनीतिक दल ऐसे मामलों में कितनी जल्दी और कितनी स्पष्ट प्रतिक्रिया देते हैं. फिलहाल, शेषराव यादव की माफी के बाद मामला शांत होने की ओर बढ़ता दिख रहा है, लेकिन यह विवाद छिंदवाड़ा की राजनीति और सामाजिक समीकरणों पर असर डाल सकता है.
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सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें
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