जंगल से निकलकर धान खरीदी केन्द्र में धान की बोरी लेने पहुंचा हाथी
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में रात 8 बजते ही बंगुरसिया धान खरीदी केन्द्र में ग्रामीण और वनकर्मी चैकन्ना हो जाते हैं। वनकर्मी व ग्रामीण 3-4 के दल में अलग-अलग जगह पर खड़े रहते। जंगल की ओर चैकन्नी नजरे होती है और हल्की आहट में टार्च की रोशनी जल उठती है। फिर भी रा
इसे देखने के लिए भास्कर की टीम भी ग्राउंड जीरो पर पहुंच गई। रात में जिला मुख्यालय से भास्कर की टीम बंगुरसिया धान खरीदी केन्द्र पहुंची।
तब हमे पता चला कि 3 हाथी मंडी में आए थे, जिसमें से एक हाथी 1-2 बोरी धान खा कर बस्ती होते हुए जंगल की ओर लौट गया है। इसके बाद हमने देखा कि 2 हाथी धान की बोरियों से कुछ ही दूरी में अलग-अलग कोने में झाड़ियों में छिपकर खड़े हैं।
ग्रामीण और वनकर्मी उन पर टार्च की रोशनी दिखा रहे हैं, ताकि वे बोरियों तक न पहुंचे। कुछ नुकसान न करे और लोगों की मौजूदगी को देखकर वापस जंगल लौट जाए, लेकिन ऐसा नहीं था।
हर रात धान खरीदी केन्द्र में हाथी पहुंचकर धान को नुकसान कर रहा
मौका मिलते ही धान की बोरी उठाकर भागा हाथी काफी देर तक ही जगह पर अपना कान हिलाते खड़े रहे। इसी बीच मौका मिलने पर एक हाथी धान की बोरियों तक पहुंचा और अपने बड़े दांत को बोरी में घुसा कर उसे सुंड से उठाकर जंगल की ओर जाने लगा।
इस दौरान ग्रामीण कई तरह की आवाज करते हुए उसके पीछे भी जाते। ताकि वे धान का बोरा छोड़ दे, लेकिन हाथी बोरियों को उठाकर जंगल किनारे ले जाकर उसे फाड़कर धान खाने और फैलाने लगा।
हाथी जंगल की ओर चले जाए, इसके लिए गजराज वाहन से कई बार सायरन भी बजाया गया, लेकिन इसका भी कोई खास फर्क उन पर नहीं दिखा। यह सिलसिला देर रात तक ऐसे ही चलते रहा।

हाथी के आने से पहले मंडी केन्द्र में वनकर्मी और हाथी मित्र दल डटे रहते हैं
भीड़ हटते ही हाथी दोबारा पहुंचते वनकर्मी गांव के ग्रामीणों को दूर रहने की समझाईश दे रहे थे, रात बढ़ते गया और ग्रामीणों की कुछ भीड़ वापस घर जाने लगी, पर हाथी मित्र दल और वनकर्मी वहीं डटे रहे।
ऐसे मे भीड़ कम होने से दोबारा हाथी फिर से धान की बोरियों तक पहुंचते और एक-एक कर धान की बोरियों को उठाकर जंगल किनारे ले जाकर खाते रहे।
यह सिलसिला रात के तकरीबन 2-3 बजे तक चलते रहा। जिसके बाद जब उनका पेट भर गया, तो वे वापस जंगल की ओर चले गए।
काफी दिनों से आ रहे इसी बीच हमने मौके पर मौजूद वनकर्मी विजय सिंह ठाकुर से भी चर्चा की, तो उन्होंने बताया कि 3 हाथी आए थे और धान की बोरियों को एक-एक कर मंडी की बांउड्री पार कर लेकर जाते हैं।
इसके बाद फिर वापस आ जाते हैं। यहां वनकर्मी, हाथी मित्र दल के सदस्य और गांव के युवा इन्हें भगाने की भी कोशिश करते हैं। हाथी पिछले काफी दिनों से हर रात यहां आ रहे हैं।
हाथी पर निगरानी की जा रही है रायगढ़ SDO मनमोहन मिश्रा ने बताया कि जब से मंडी शुरू हुई तब से हाथी का आना जाना शुरू हो गया है। हाथी धान का बोरा उठाकर फैला और खा रहा है। कई बार बीच-बीच में हाथी शाम 7 बजे आ जाता है।
हमारे स्टाप लगे हुए हैं और मंडी वाले भी होते हैं। ऐसा भी होता है कि किसी रात दो बार हाथी आ जाते हैं। नुकसान का आंकलन कर मुआवजा बनाया जा रहा है।
हाथी रायगढ़ वन मंडल में 40 से 45 की संख्या में हैं और इसमें शावक भी हैं। ग्रुप और हाथी शावक मंडी तक नहीं आते हैं। दंतैल हाथी हैं, जो वही बस आता है। लगातार इन पर निगरानी की जा रही है।
10 दिन में 76 बोरी धान नुकसान 17 दिसबंर 9 बोरी धान 18 दिसबंर 6 बोरी धान 20 दिसबंर 2 बोरी धान 21 दिसबंर 3 बोरी धान 23 दिसबंर 4 बोरी धान 24 दिसबंर 14 बोरी धान 25 दिसबंर 5 बोरी धान 26 दिसबंर 6 बोरी धान 27 दिसबंर 18 बोरी धान 28 दिसबंर 9 बोरी धान
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