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जिले के रिविलगंज प्रखंड अंतर्गत बैजू टोला निवासी अचल सिंह मुखड़ेरा चवर में 15 बीघा लीज पर जमीन लेकर मटर का खेती किए है. उन्होंने कहा कि बिना सरकारी मदद के वो अपनी फसल को बचाने में नाकाम हैं और लोग कर्जदार हो जाएंगे. किसान अचल ने कहा कि अगर मैं फसल नहीं बचा पाऊंगा तो कर्ज मेरे ऊपर लद जाएगा. जिला प्रशासन से मैं निवेदन करता हूं कि नीलगाय को पकड़ा जाए और पक्षियों को हरकने के लिए कोई व्यवस्था की जाए.
विशाल कुमार/छपरा: किसानी को लोग इसीलिए बहुत फायदे का काम नहीं मानते हैं क्योंकि इसमें मेहनत ज्यादा और आमदनी कम होती है. खाद से लेकर बीज, पानी और फसल की बिक्री से लेकर अपने अनाज का पैसा पाने तक किसानों को बहुत सी चीजों के लिए सरकार पर निर्भर रहना पड़ता है. इसके बाद किसानों को अपनी फसल को कई तरह से बचाना पड़ता है. उन्हें नीचे जमीन पर चौपाया जानवरों से बचाना पड़ता है तो आसामान में उड़ने वाले पक्षियों से फसलों को बचाना पड़ता है. नीचे तो खेतों की तारबाड़ी कर फसलों को जानवर से बचाया जा सकता है लेकिन, आसमान में उड़ते परिंदों से फसलों को कैसे बचा पाएंगे. ऐसे में बिहार के छपरा के किसान अपनी मटर की फसल को बचाने के लिए जान जोखिम में डाल रहे हैं.
कंपा देने वाली इस कड़ाके की ठंड में भी किसान शीतलहर के बीच पूरे दिन-रात खेतों की रखवाली कर रहे हैं. इसके बावजूद भी किसान अपने फसल को पशु और पक्षी से बचाने में नाकाम साबित हो रहे हैं. फसलों को सिर्फ नीलगाय ही नहीं चट कर रही हैं बल्कि उनके ऊपर आसमान से भी हमला हो रहा है. जमीन पर पशु तो आसमान से पक्षियों का हमला. नीलगाय से तो किसान किसी तरह फसलों को बचा ले रहे हैं, लेकिन सैकड़ो की संख्या में काग पक्षी के हमले से किसान मटर को नहीं बचा पा रहे हैं. फलन तैयार होते ही पक्षियों का झुंड उसे अपना भोजन बना ले रहा है. इससे किसानों को मटर का फलन हाथ नहीं लग रहा है. कई किसान तो कर्ज लेकर खेती किए हैं जिनके अब कर्ज चुकाना भी मुश्किल होगा.
किसानों ने कर्ज लेकर लीज पर जमीन लिया और फिर मुनाफे की आस में मटर की खेती की. ऐसे में अगर फसल नहीं बचती है तो अब कर्ज कैसे चुका पाएंगे. किसानों के लिए यह बड़ी चुनौती हो गई है. इस बात को सोचकर किसान घर में चैन से सो नहीं पा रहे हैं. पूरे रात और दिन जागकर खेतों की रखवाली कर रहे हैं.
जिले के रिविलगंज प्रखंड अंतर्गत बैजू टोला निवासी अचल सिंह मुखड़ेरा चवर में 15 बीघा लीज पर जमीन लेकर मटर का खेती किए है. उन्होंने इसकी रखवाली के लिए एक मजदूर भी रखा है. इसके बाद भी वह फसल को नीलगाय और पक्षियों से बचा नहीं पा रहे हैं. इससे उनकी नींद उड़ी हुई है. लोकल 18 से अचल सिंह ने बताया कि लीज 15 बीघा जमीन लेकर मटर की खेती की. इसे बचाने के लिए 24 घंटा रखवाली करना पड़ रहा है. इसके बावजूद भी फसल को बचना मुश्किल हो गया है. दिन रात नीलगाय चर रही है. कभी इधर तो कभी उधर से दर्जनों की संख्या में नीलगाय घुस रही हैं और फसल को बर्बाद कर रही हैं. हालांकि, इसको तो कभी-कभी हम लोग कंट्रोल कर लेते हैं लेकिन, अब आसमान में उड़ने वाले पक्षियों को कौन कंट्रोल कर सकता है. 500 से भी अधिक संख्या में काग का झुंड आ रहा है जो मटर खा जाते हैं.
लोग ईंट-पत्थर फेंककर मारते हैं इसके बाद भी कोई असर नहीं हो रहा है. लोग एक तरफ पक्षी उड़ाते हैं तो दूसरी तरफ वो आकर फसल चट कर जाते हैं. ऐसे में मटर किसानों ने इसमें सरकार से पहले की मांग की है. उन्होंने कहा कि बिना सरकारी मदद के वो अपनी फसल को बचाने में नाकाम हैं और लोग कर्जदार हो जाएंगे. किसान अचल ने कहा कि अगर मैं फसल नहीं बचा पाऊंगा तो कर्ज मेरे ऊपर लद जाएगा. जिला प्रशासन से मैं निवेदन करता हूं कि नीलगाय को पकड़ा जाए और पक्षियों को हरकने के लिए कोई व्यवस्था की जाए. उन्होंने कहा कि खेत की रखवाली करते-करते उनकी नींद उड़ गई है. सोने से सिर दर्द करने लगता है. उन्होंने यह भी बताया कि इस समस्या से पूरे इलाके भर के सैकड़ों किसान परेशान हैं.
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