समय का पहिया जब घूमता है, तो अपने साथ बदलाव की नई कहानी लिखता है। साल 2007 का वह दौर याद कीजिए, जब अलीगढ़ की पहचान केवल तंग गलियों के ताला उद्योग और एएमयू की तालीम तक सिमटी थी। आज वर्ष 2026 में खड़ा अलीगढ़ एक बिल्कुल अलग कहानी कहता है। बीते 19 वर्षों में अलीगढ़ ने कस्बाई शहर के चोले को उतारकर एक स्मार्ट महानगर का आधुनिक लिबास पहन लिया है। जिससे आम लोगों के जीवन स्तर में व्यापक सुधार हुआ है। आने वाले वर्षों में यह अनवरत रूप से आगे बढ़ता रहेगा।
कनेक्टिविटी : हाईवे से एयरपोर्ट तक
2007 में दिल्ली का सफर घंटों की थकान लेकर आता था, लेकिन आज अलीगढ़-पलवल हाईवे और यमुना एक्सप्रेस-वे ने अलीगढ़ को राजधानी के दरवाजे पर खड़ा कर दिया है। जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण ने अलीगढ़ के उद्यमियों के लिए वैश्विक व्यापार के नए रास्ते खोल दिए हैं। सोने पर सुहागा यह कि जिले को अपना घरेलू अलीगढ़ एयरपोर्ट भी मिल गया है, जिसने यहां की उड़ानों को नए पंख दे दिए हैं।
बुनियादी ढांचा : फ्लाईओवर और सिक्सलेन ने पकड़ी रफ्तार
शहर के भीतर कभी जाम का पर्याय माने जाने वाले इलाकों की तस्वीर अब बदल रही है। क्वार्सी चौराहा फ्लाईओवर और एटा चुंगी फ्लाईओवर यातायात को सुधारने के लिए तेजी से बन रहे हैं। क्वार्सी फ्लाईओवर जल्द ही आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा, वर्ष 2027 तक एटा चुंगी फ्लाईओवर भी बनकर तैयार हो जाएगा।
जीटी रोड सिक्सलेन बाईपास के बनने से भारी वाहनों का दबाव शहर के बाहर ही सिमट गया, जिससे अलीगढ़ की सड़कों ने चैन की सांस ली। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट ने शहर के चौराहों, पार्कों और ड्रेनेज सिस्टम को आधुनिक तकनीक से लैस कर ”इज ऑफ लिविंग” (सुगम जीवन) के सपने को सच किया है।
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