चंडीगढ़ स्थित पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) ने के न्यूरो और ENT सर्जन्स की टीम ने एक जटिल ऑपरेशन किया। पहली बार मात्र 2 साल के बच्चे में 7 सेमी का विशाल स्कल बेस मेनिन्जियोमा (खोपड़ी के निचले हिस्से में पैदा होने वाला एक दुर्लभ ब्रेन ट्यूमर) पूरी तरह एंडोस्कोपी के जरिए नाक के रास्ते सफलतापूर्वक हटाई गई है। यह ऑपरेशन करीब 9 घंटे तक चला। यह सर्जरी न सिर्फ भारत के लिए गर्व का विषय है। पूरी दुनिया में न्यूनतम इनवेसिव पेडियाट्रिक न्यूरोसर्जरी की नई मिसाल बन गई है। हरियाणा के बच्चे को आई दिक्कत यह बच्चा सोनीपत, हरियाणा का रहने वाला था। शुरू में बाएं आंख का बाहर निकलना (प्रॉप्टोसिस), आंखों की हलचल रुकना, खर्राटे, नाक में गांठ दिखना और आंखों से ज्यादा पानी आने की दिक्कत हुई। जब जांच हुई तो पता चला कि 7 सेमी का विशाल ट्यूमर नाक, साइनस, ब्रेन और ऑर्बिट तक फैल चुका था। बायोप्सी( मेडिकल टेस्ट) से कन्फर्म हुआ मेनिन्जियोमा (बच्चों में बेहद दुर्लभ) है। लेकिन पीजीआई के प्रो. धंदापानी (न्यूरोसर्जरी) और प्रो. अनुराग (ENT) के नेतृत्व में मल्टीडिसिप्लिनरी टीम ने एक्सपैंडेड एंडोनेजल एंडोस्कोपिक अप्रोच चुनी। नाक के रास्ते ही ट्यूमर तक पहुंचा गया। इस दौरान कई तकनीकों का प्रयोग किया। ऑपरेशन काफी जटिल था ट्यूमर बहुत वैस्कुलर (खून से भरपूर) था, हड्डियों और गहरी जगहों में फैला हुआ। लेकिन 9 घंटे की मेहनत के बाद पूरी तरह एंडोस्कोपी से हटा दिया गया । ओपन क्रेनियोटॉमी की जरूरत ही नहीं पड़ी! स्कल बेस का बड़ा डिफेक्ट मल्टीपल लेयर्स से रिपेयर किया गया । सर्जरी के बाद बच्चे की हालत सुधर गई है और MRI से टोटल एक्सीजन कन्फर्म हो चुका है। पहले स्पेन में हुआ था केस ऐसा ही एक केस 2020 में स्पेन की 12 साल की लड़की का था, लेकिन उसे ओपन सर्जरी करनी पड़ी थी। इतने छोटे बच्चे में यह ऑपरेशन बेहद जोखिम भरा था । हाइपोथर्मिया, खून की कमी, फ्लूइड डिस्टर्बेंस जैसी जानलेवा समस्याएं हो सकती थीं।
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