पीजीआई चंडीगढ़ संगरूर सैटेलाइट सेंटर में HIS-2 लागू कर दिया गया है।
पीजीआई चंडीगढ़ में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को जल्द ही ओपीडी कार्ड बनवाने के लिए लंबी कतारों में नहीं लगना पड़ेगा। अस्पताल की सेवाओं को डिजिटल और मरीज-केंद्रित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए पीजीआई ने अपने हॉस्पिटल इन्फॉर्मेशन सिस्टम (एचआईएस
पीजीआई इस योजना पर लंबे समय से काम कर रहा था। नए एचआईएस-2 सिस्टम के जरिए संपर्क केंद्रों को आपस में जोड़ा जा सकेगा, जिससे मरीजों का रजिस्ट्रेशन, बिलिंग और अन्य सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर आसान हो जाएंगी। इसका सबसे ज्यादा फायदा उन मरीजों को मिलेगा, जो ग्रामीण इलाकों या छोटे शहरों से आते हैं और तकनीकी जानकारी की कमी के कारण सुबह-सुबह कार्ड बनवाने के लिए लाइन में लगने को मजबूर होते हैं।
पीजीआई चंडीगढ़।
पहले चरण में ये मॉड्यूल लागू
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक पहले चरण में मरीजों के रजिस्ट्रेशन, बिलिंग और एडमिशन-डिस्चार्ज ट्रांसफर से जुड़े मॉड्यूल लागू कर दिए गए हैं, जिनका इस्तेमाल रोजमर्रा के कामकाज में शुरू हो चुका है। इसके अलावा डॉक्टर डेस्क, लैबोरेटरी सेवाएं और स्टोर इन्वेंट्री मैनेजमेंट जैसे अहम मॉड्यूल्स पर प्रशिक्षण और ट्रायल रन लगभग पूरा हो चुका है, जिन्हें जल्द शुरू किया जाएगा।

पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल।
कामकाज में पारदर्शिता और मरीजों को सुविधा
पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा कि नए एचआईएस-2 सिस्टम से अस्पताल के कामकाज में पारदर्शिता और कार्यक्षमता बढ़ेगी, साथ ही मरीजों की सुविधा में भी बड़ा सुधार होगा। रजिस्ट्रेशन, बिलिंग और अन्य सेवाओं के लिए मरीजों को अलग-अलग काउंटरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, जिससे समय की बचत होगी। संगरूर में लागू किया गया यह डिजिटल मॉडल भविष्य में पीजीआई के सभी केंद्रों में एक समान और सहज सेवाएं सुनिश्चित करने में मदद करेगा।
ऑनलाइन अपॉइंटमेंट और टेस्ट रिपोर्ट ट्रैकिंग की सुविधा
डिप्टी डायरेक्टर पंकज राय ने बताया कि संगरूर सैटेलाइट सेंटर में यह सिस्टम एक जनवरी से लागू करने की योजना थी, जिसे पूरी टीम के सहयोग से तय समय पर शुरू कर दिया गया। यह सिस्टम अस्पताल संचालन को आसान बनाने के साथ-साथ रियल-टाइम डेटा उपलब्ध कराएगा। सी-डैक नोएडा द्वारा विकसित इस एचआईएस सिस्टम के लागू होने से 350 बेड वाले संगरूर सैटेलाइट सेंटर में मरीजों की देखभाल की गुणवत्ता में सुधार होगा।
नए सिस्टम के तहत मरीजों को ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, मोबाइल ऐप, क्यूआर कोड आधारित रजिस्ट्रेशन, बिल भुगतान और टेस्ट रिपोर्ट ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं मिलेंगी, जिससे इलाज की पूरी प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा सरल और तेज हो जाएगी।
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