वह दो महिला पार्षद जिनकी वजह से चंडीगढ़ की राजनीति बदल गई।
नगर निगम में अब भारतीय जनता पार्टी फुल हाउस के आधे पार्षद लेकर सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। नगर निगम की भाजपा मेयर हरप्रीत कौर बबला द्वारा 30 दिसंबर को जरनल हाउस की बैठक बुलाई है। इससे पहले दो पार्षदों को भाजपा में शामिल कर कई तरह की चर्चाएं छेड़ दी गई ह
एक तो नव वर्ष के पहले ही माह में मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के चुनाव होने हैं। इससे भाजपा को बड़ा फायदा होने वाला है और जरनल हाउस की बैठक में पिछले कई माह से लटक रहे प्रस्तावों को पारित करवाने के लिए भी भाजपा की यह जुगत हो सकती है। इसमें सबसे बड़ा प्रस्ताव मनीमाजरा हाउसिंग प्रोजेक्ट और चंडीगढ़ में 24 घंटे पानी सप्लाई के प्रोजेक्ट का है।
चंडीगढ नगर निगम की बैठक के दौरान 26 दिन पहले भाजपा मेयर के खिलाफ धरना दिया और आज भाजपा ज्वाइन कर ली।
सांसद को मिलाकर 36 वोट, मेयर पद से एक वोट दूर भाजपा चंडीगढ़ नगर निगम में कुल 35 पार्षद हैं। मेयर चुनाव में चंडीगढ़ सांसद का वोट भी मान्य होता है। इसके अलावा 9 पार्षद नॉमिनेटेड होते हैं, जिनके पास वोटिंग राइट्स नहीं हैं।
ऐसे में 36 वोटों में से भाजपा के पास अब तक 16 और AAP के पास 13 वोट थे। मगर, अब 2 पार्षदों के AAP छोड़ने के बाद भाजपा के पास 18 और AAP के पास 11 वोट रह गए हैं। कांग्रेस के पास 6 पार्षद और सांसद मनीष तिवारी को मिलाकर कुल 7 वोट हैं।
मेयर बनाने के लिए कुल 19 वोट चाहिए। भाजपा के पास अब 18 वोट हो गए हैं। ऐसे में भाजपा को एक वोट की दरकार है।

चंडीगढ़ में भाजपा कैसे मेयर बना सकती है, 2 सिनेरियो
- BJP को जीत के लिए 1 और पार्षद चाहिए: इस बार सीक्रेट बैलेट से नहीं बल्कि हाथ उठाकर वोटिंग होनी है। ऐसे में गुपचुप क्रॉस वोटिंग की संभावना नहीं है। निगम में 35 पार्षद और एक सांसद का वोट मेयर चुनाव के लिए मान्य होगा। 2 पार्षदों के पार्टी बदलने के बाद भी भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस व आप के पास 18-18 वोट हो गए हैं। ऐसे में भाजपा को अभी एक और पार्षद तोड़ना होगा ताकि हाथ उठाकर वोटिंग के वक्त उनके पास 19 पार्षद हों।
- मेयर चुनाव में 1 गैरहाजिर, BJP को सीधी जीत: अगर मेयर चुनाव के दिन विपक्षी पार्टी कांग्रेस और AAP में से किसी भी पार्टी का पार्षद बीमारी या किसी अन्य वजह से गैरहाजिर हो जाता है तो ऐसी सूरत में विरोधियों का एक वोट कम हो जाएगा और भाजपा 18 पार्षदों के बलबूते अपना मेयर बना लेगी।
पिछली बैठक में दो प्रस्तावों को लेकर वोटिंग पर अड़ गया था विपक्ष
- नगर निगम की 3 नवंबर को हुई बैठक के दौरान दो बड़े प्रस्ताव नगर निगम की बैठक में लाए गए थे। इनमें से मनीमाजरा हाउसिंग प्रोजेक्ट और चंडीगढ़ शहर में 24 घंटे वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट लाने का प्रस्ताव था।
- नगर निगम की सबसे छोटी पार्टी कांग्रेस के पार्षदों ने जमकर विरोध किया था और दोनों की मुद्दों पर वोटिंग करवा लेने की मांग की थी। यही नहीं मांग नहीं माने जाने पर उनकी तरफ से खुद ही हाथ खड़े कर वोटिंग कर दी थी। इसे माना तो नहीं गया मगर दोनों प्रस्ताव पारित नहीं हो सके थे।
- यही नहीं मनीमाजरा हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए तो स्पेशल सेशन तक बुलाने का प्रयास किया गया था मगर इसमें भी कामयाबी नहीं मिल पाई थी। अब जब हाउस में भाजपा के पास कांग्रेस और आप से ज्यादा पार्षद हो गए हैं तो वह दोनों प्रस्ताव पारित करवाने का प्रयास कर सकते हैं।

भारतीय जनता पार्टी के चंडीगढ प्रदेश अध्यक्ष रजनीश पाल मलहोत्रा।
हम अभी चुनावी मोड़ में नहीं, भाजपा अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जतिंदर पाल मलहोत्रा कहते हैं कि अभ हम चुनावी मोड में नहीं हैं। जब मेयर पद का चुनाव आएगा तब देखेंगे। तो इस समय पार्षदों के पाला बदलने पर उनका कहना है कि वह नरेंद्र मोदी जी और सरकार की नीतियों से प्रभावित होकर भाजपा में शामिल हुए हैं। मेयर पद का चुनाव अभी दूर है, जब आएगा तब देखेंगे क्या करना है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष एचएस लक्की।
सत्ता के लिए हॉर्स ट्रेडिंग जैसे अनैतिक हथकंडों का सहारा ले रही भाजपा, कांग्रेस अध्यक्ष कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष एचएस लक्की का कहना है कि भाजपा ने एक बार फिर अपना असली रंग दिखा दिए हैं। सत्ता से चिपके रहने के लिए उसने खुलेआम और बेशर्मी से हॉर्स ट्रेडिंग जैसे अनैतिक हथकंडों का सहारा लिया है। इस तरह की शर्मनाक गतिविधियां भाजपा की सत्ता की भूख को पूरी तरह उजागर करती हैं।
वहीं दूसरी ओर आम आदमी पार्टी की कमजोरी और राजनीतिक असहायता भी पूरी तरह सामने आ गई है। इन्हीं अलोकतांत्रिक प्रथाओं पर रोक लगाने के लिए हम नगर निगम में मेयर का पांच वर्षों का निश्चित कार्यकाल लागू करने की मांग कर रहे हैं, ताकि स्थिरता, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान सुनिश्चित किया जा सके।