चंडीगढ़ में अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन एक बार फिर बड़े अभियान की तैयारी में है। अप्रैल में धनास कच्ची कॉलोनी पर बुलडोजर चलाने की योजना बनाई गई है। लगभग 36 साल पुरानी सेक्टर-38 वेस्ट की शाहपुर कॉलोनी हटाने के बाद अब प्रशासन की नजर धनास पर है जहां तीन हजार से अधिक झुग्गी-टीन शेड और कुछ पक्के मकान बने हुए हैं। इस कॉलोनी में करीब 10 हजार लोग रहते हैं, इनमें से 2500 के करीब मतदाता है।
डीसी कम एस्टेट ऑफिसर निशांत कुमार यादव ने इस संदर्भ में इन्फोर्समेंट विंग को धनास कच्ची कॉलोनी के बाशिंदों को जगह खाली करने को लेकर नोटिस चस्पा करने की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दे दिए हैं। इन्फोर्समेंट विंग की कार्रवाई के अलावा संपदा विभाग यहां के बाशिंदों को नोटिस भी भेज रहा है।
धनास कच्ची कॉलोनी के बाशिंदों ने सुप्रीम कोर्ट में चंडीगढ़ प्रशासन के खिलाफ इस जमीन के बदले पुर्नवास योजना के तहत मकान देने या दूसरी जगह यहां के बाशिंदों को छत मुहैया कराने के लिए या फिर कॉलोनी को तोड़ने के खिलाफ रोक लगाने की याचिका दायर की थी। संपदा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि सुप्रीमकोर्ट ने अपने आदेश में यह स्पष्ट कर दिया है कि धनास कच्ची कॉलोनी एग्रीकल्चर लैंड पर बसी है। ऐसे में एग्रीकल्चर लैंड पर बसी अवैध कॉलोनी पर कानून के तहत कार्रवाई करना या अन्य प्रशासनिक फैसला लेने का चंडीगढ़ प्रशासन को पूरा अधिकार है।
एसआईआर के तहत ढाई हजार मतदाताओं के कटेंगे नाम
प्रशासन का चुनाव विभाग धनास कच्ची काॅलोनी के करीब ढाई हजार मतदाताओं को भी स्पेशल इंटेंसिव रीविजन (एसआईआर) की प्रक्रिया के तहत हटाने की तैयारी में है। दरअसल धनास कच्ची कॉलोनी जमींदारों की कृषि भूमि पर बसी हुई है। यहां लोगों ने पानी-बिजली के कनेक्शन लेकर वोट तक बनवा लिए थे, लेकिन संपदा विभाग के रिकॉर्ड में यह कॉलोनी हमेशा ही अवैध रही। अब संपदा विभाग की कार्रवाई को देखते हुए यहां के मतदाताओं के नाम भी सूची से हटाए जाएंगे।
18 कॉलोनी तोड़कर प्रशासन अब तक 520 एकड़ जमीन खाली करा चुका
प्रशासन ने अब तक कुल 18 कॉलोनी को खाली कराया है। इन 18 कॉलोनी को खाली कराकर प्रशासन ने अपनी 520 एकड़ सरकारी जमीन पर दोबारा कब्जा लिया है, जिसकी आज के समय में 21 हजार करोड़ रुपये कीमत है। बीते साल संपदा विभाग ने सेक्टर-25 जनता कॉलोनी चंडीगढ़ की सबसे बड़ी स्लम बस्ती थी। एस्टेट ऑफिस ने बीते 6 व 7 मई को इस कॉलोनी को हटाया। लगभग 10 एकड़ भूमि जिसकी कीमत 350 करोड़ हैं, इस सरकारी जमीन पर प्रशासन ने अपना कब्जा लिया। इस जमीन पर लगभग 10, हजार लोग रहते थे। इसी तरह इंडस्टि्रयल एरिया स्थित संजय कॉलोनी को एस्टेट ऑफिस ने बीते 23 अप्रैल को खाली कराया। यह कॉलोनी लगभग 6 एकड़ भूमि पर बनी थी, इस जमीन की कीमत लगभग 250 करोड़ रुपये है, यहां करीब 5 हजार लोग रहते थे। सेक्टर-54 आदर्श कॉलोनी को बीते 19 जून को खाली कराया गया। यह कॉलोनी लगभग 12 एकड़ जमीन पर बनी हुई थी, इस जमीन की कीमत लगभग 750 करोड़ रुपये हैं।
प्रशासन को लैंड पूलिंग पॉलिसी लानी चाहिए
वार्ड नंबर-14 के पार्षद कुलजीत सिंह संधू ने कहा कि धनास कच्ची कॉलोनी को नहीं तोड़ा जाना चाहिए, इससे हजारों लोग बेघर हो जाएंगे। संधू ने कहा कि प्रशासन को पंजाब और हरियाणा के तर्ज पर चंडीगढ़ के किसानों के लिए लैंड पूलिंग पॉलसी लानी चाहिए, ताकि किसान अपनी जमीन प्रशासन को देकर अपनी आमदन का स्त्रोत या नए कामकाज को स्थापित कर सके। शहरीकरण के कारण खेतीबाड़ी में मुनाफा कम होने के कारण किसानों व जमींदारों ने यहां लोगों को टीन शेड के अस्थायी मकान बनाकर रहने की अनुमति दे दी। जिससे ये कॉलोनी बन गईं।
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