दरअसल, यह पूरा विवाद लापता 328 पावन स्वरूपों की खोज से जुड़ा है. माघी मेले के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा था कि एसआईटी (SIT) की जांच में नवांशहर जिले के बंगा स्थित ‘नाभ कंवल राजा साहिब’ डेरे से 169 पावन स्वरूप बरामद किए गए हैं. सीएम के उस बयान से यह संदेश गया था कि वहां कुछ गड़बड़ी है या ये स्वरूप अवैध रूप से रखे गए थे.
मंत्रियों का ‘यू-टर्न’: सब कुछ सही है
मुख्यमंत्री के बयान के बाद संगत में मचे बवाल और रोष को शांत करने के लिए आज पंजाब सरकार के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस और सांसद मालविंदर कंग खुद बंगा स्थित गुरुद्वारा साहिब पहुंचे. वहां नतमस्तक होने और रिकॉर्ड की जांच करने के बाद मंत्रियों ने जो कहा, वह सीएम के दावे के बिल्कुल उलट था.
हरपाल सिंह चीमा ने स्पष्ट किया. उन्होंन कहा, हमने जांच में पाया कि श्री नाभ कंवल राजा साहिब जी के पास मौजूद 169 स्वरूपों का रिकॉर्ड पूरी तरह से दुरुस्त है. जो रिकॉर्ड रखा गया था, वह सही पाया गया है. मैनेजमेंट कमेटी के खिलाफ किसी भी तरह का मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है और न ही कोई गलती पाई गई है. जब उनसे पूछा गया कि सीएम ने फिर ऐसा दावा क्यों किया, तो चीमा ने इसे अधिकारियों की गलती बताया. उन्होंने कहा, “जिस SIT ने सीएम को जानकारी भेजी थी, लगता है कि वहां कोई ‘मिसकम्युनिकेशन’ हुआ था जो आगे बढ़ गया. अब वह दूर हो गया है. चीमा ने यह भी कहा कि गायब 328 स्वरूपों को ढूंढने के लिए जांच जारी रहेगी, लेकिन इस स्थान पर मिले स्वरूपों में कोई गड़बड़ी नहीं है.
अकाली दल आक्रामक
सरकार के इस यू-टर्न पर शिरोमणि अकाली दल ने तीखा हमला बोला है. अकाली दल के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि वित्त मंत्री के बयान ने मुख्यमंत्री की पोल खोल दी है. दलजीत चीमा के तीखे सवाल किए कि अगर रिकॉर्ड सही थे, तो मुख्यमंत्री ने माघी मेले जैसे पवित्र मंच से झूठा दावा क्यों किया? सीएम ने बिना तथ्यों की जांच किए संगत की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है और एक सम्मानित धार्मिक स्थान की मैनेजमेंट कमेटी को बदनाम किया है. यह केवल ‘मिसकम्युनिकेशन’ नहीं है, बल्कि धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ है. मुख्यमंत्री को अपनी गलती माननी चाहिए और तुरंत अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए.
विधायक सुक्खी की अनुपस्थिति पर बोले मंत्री
इस दौरान जब वित्त मंत्री से स्थानीय विधायक डॉ. सुखविंदर कुमार सुक्खी के साथ न होने पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि उनके पिता बहुत गंभीर हालत में वेंटिलेटर पर हैं, इसलिए वे शामिल नहीं हो सके. पंजाब की राजनीति में धर्म और स्वरूपों की मर्यादा का मुद्दा हमेशा बेहद संवेदनशील रहा है. 328 पावन स्वरूपों का गायब होना सिख संगत के लिए एक भावनात्मक पीड़ा है. ऐसे में, सीएम द्वारा बिना पूरी पुष्टि के दावा करना और फिर मंत्रियों द्वारा उसे ‘गलतफहमी’ बताना सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है. अब देखना यह है कि अकाली दल इस मुद्दे को कितना तूल देता है और ‘आप’ सरकार इस सियासी चक्रव्यूह से कैसे बाहर निकलती है.
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