धर्म, आस्था और आध्यात्मिक चेतना की पावन भूमि महेश्वर में मां रेवा आरती एवं मां नर्मदा भक्त मंडल के तत्वावधान में मां नर्मदा प्रकटोत्सव (जन्म जयंती) का भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन श्रद्धा, भक्ति और अनुशासन के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
प्रातःकाल मुख्य गणेश घाट पर पंडित कमल भटौरे के आचार्यत्व में मां नर्मदा का दुग्धाभिषेक, विधिवत पूजन-अर्चन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार एवं शंखनाद से संपूर्ण घाट क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो उठा। इस अवसर पर जयंतीलाल सरवैया ग्रुप (मुंबई एवं अहमदाबाद) द्वारा मां रेवा को भव्य चुनरी अर्पित की गई। वहीं नवयुवक रेवा मंडल द्वारा दक्षिण तट से उत्तर तट तक 1008 चुनरियों का अर्पण कर भक्तिमय एवं अनुपम दृश्य प्रस्तुत किया गया।
तिलभांडेश्वर भक्त मंडल, मां नर्मदा भक्त मंडल चिंतन संस्था तथा मालन अंचल के ग्रामीण श्रद्धालुओं द्वारा भी सामूहिक पूजन-अर्चन एवं चुनरी अर्पण कर आयोजन की गरिमा को और अधिक बढ़ाया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत कन्या पूजन का आयोजन भी किया गया, जिसमें कन्याओं का विधिवत पूजन कर उन्हें उपहार प्रदान किए गए।
नर्मदा जयंती पर महेश्वर के घाट पर उमड़ी भीड़
– फोटो : अमर उजाला
दीपों से जगमगाया नर्मदा घाट, सजी भक्ति की अलौकिक छटा
सायंकाल विशेष दीप सज्जा के साथ नर्मदा घाट मेले के स्वरूप में परिवर्तित हो गया। अनुमानित 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने इस दिव्य आयोजन में सहभागिता की। मां नर्मदा जन्म जयंती की संध्या आरती के दौरान विशेष आकर्षण के रूप में बाहर से मंगाया गया 365 बत्ती धागे का विशाल दीपक प्रज्वलित किया गया, जिसमें 1551 दीपों से कुल 5,51,551 ज्योतियां प्रज्ज्वलित की गईं। दीपों से सुसज्जित नर्मदा घाट अद्भुत, अलौकिक एवं अविस्मरणीय दृश्य में परिवर्तित हो गया।
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नर्मदा जयंती पर मां नर्मदा को चुनरी चढ़ाई गई।
– फोटो : अमर उजाला
मां नर्मदा की महिमा
शास्त्रों में वर्णित है कि कलियुग में मां नर्मदा एकमात्र ऐसी नदी हैं, जिनके दर्शन मात्र से जीव पवित्र हो जाता है। स्मरण से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं, दर्शन से तीन जन्मों के तथा स्नान से असंख्य जन्मों के पाप भस्म हो जाते हैं। मां नर्मदा केवल एक नदी नहीं, बल्कि चलती-फिरती मोक्षदायिनी शक्ति हैं, जिनकी परिक्रमा स्वयं में एक महान तपस्या मानी जाती है।