Agriculture News: किसान अमर सिंह लोधी ने लोकल 18 से कहा कि अरंडी का पौधा औषधीय गुणों से भरपूर होता है. खराब और पथरीली जमीन पर भी इसे आसानी से लगाया जा सकता है. यह साल में दो से तीन बार फल देता है. इसमें दवाई या खाद की जरूरत नहीं पड़ती है.
कम लागत में तैयार होने वाली अरंडी की फसल किसानों के लिए मुनाफे का सौदा साबित हो रही है. उत्पादन साल में दो बार होने से किसानों को नियमित नकद आय मिलती रहती है. यही वजह है कि अब युवा किसान भी इस खेती की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं.
कहीं भी उगाया जा सकता है पौधा
अरंडी फसल की सबसे बड़ी खासियत है कि इसे बंजर, ऊबड़-खाबड़ और पथरीली जमीन पर भी आसानी से लगाया जा सकता है. जहां परंपरागत फसलें पानी और उपजाऊ मिट्टी के अभाव में नष्ट हो जाती हैं लेकिन यह फसल बिना किसी देखभाल के तैयार हो जाती है. खेत की मेड़, बहगड़ और अनुपयोगी पड़ी जमीन का उपयोग कर किसान अतिरिक्त आमदनी कमा सकते हैं. खाद, कीटनाशक और सिंचाई पर खर्च न होने से किसानों की आर्थिक जोखिम भी बेहद कम हो जाती है.
किसानों की जुबानी
किसान अमर सिंह लोधी लोकल 18 को बताते हैं कि अरंडी का पौधा औषधीय गुणों से भरपूर है और खराब और पथरीली जमीन पर भी आसानी से लगाया जा सकता है. यह पौधा साल में 2 से 3 बार फल देता है. इसके लिए दवाई या खाद की जरूरत नहीं पड़ती. जहां पानी नहीं होता, वहां भी इसकी पैदावार अच्छी होती है. इसका फल 40 से 50 रुपये किलो तक बिक जाता है. जयकुमार यादव बताते हैं कि कई ऐसी जमीन होती हैं, जहां कोई फसल नहीं होती. अरंडी पौधे को लगाने के बाद खर्च न के बराबर होता है और 2 से 3 साल तक लगातार आमदनी मिलती है. फसल कुछ महीनों में फल देना शुरू कर देती है और पानी-खाद की चिंता बिल्कुल नहीं रहती. इसके पत्तों से गंभीर चोटों की सिंकाई की जाती है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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