चंडीगढ़ नगर निगम के स्टोर में वर्षों से खड़ी लावारिस गाड़ियां अब गंभीर समस्या बन चुकी हैं। पिछले करीब 29 वर्षों में अलग-अलग मामलों में जब्त की गई 500 से ज्यादा चार पहिया और सैकड़ों दोपहिया गाड़ियां स्टोर में जमा हैं, जिन्हें लेने कोई नहीं आया। इससे स्टोर में जगह की भारी कमी हो गई है और हालात बदतर होते जा रहे हैं।
कर्मचारियों के अनुसार वर्ष 1996-97 से गाड़ियों का जमावड़ा शुरू हुआ। अवैध पार्किंग या अवैध गतिविधियों के मामलों में जब्त की गई ये गाड़ियां कागजी प्रक्रियाओं और विभिन्न विभागों से एनओसी की जटिलताओं के कारण आज तक नीलाम नहीं हो सकीं। कई वाहन चंडीगढ़ से बाहर के जिलों के हैं, जिनके लिए संबंधित आरटीओ, पुलिस और बीमा कंपनियों की एनओसी जरूरी है। इसी वजह से गाड़ियां वर्षों से जंग खा रही हैं।
जगह की कमी, सुरक्षा का खतरा
जगह कम होने के कारण अब एक गाड़ी के ऊपर दूसरी गाड़ी रखनी पड़ रही है। स्टोर कारों के ढेर में तब्दील हो चुका है। कर्मचारियों का कहना है कि यहां सांप-बिच्छू निकलना आम हो गया है जिससे जान का खतरा बना रहता है। बरसात में पानी भरने से गाड़ियां और ज्यादा खराब हो रही हैं। यदि समय रहते नीलामी प्रक्रिया को सरल किया जाए तो केवल कबाड़ बेचकर ही करोड़ों रुपये का राजस्व कमाया जा सकता है। देरी के कारण समस्या और विकराल होती जा रही है।
कारों और अन्य सामान की नीलामी के लिए कागजी प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए थे। इस मामले में नगर आयुक्त से फिर बात की जाएगी। इससे निगम को अच्छा राजस्व मिलेगा। – हरप्रीत कौर बबला, मेयर
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