ठोस कचरे में बढ़ोतरी और लैंडफिल पर बढ़ते दबाव के बीच एमसीडी ने ओखला स्थित अपशिष्ट-से-ऊर्जा (वेस्ट टू एनर्जी) संयंत्र की क्षमता का विस्तार करने का निर्णय लिया है। इस कड़ी में मौजूदा 1550 टन प्रतिदिन की कचरा प्रसंस्करण क्षमता को बढ़ाकर 2550 टन प्रतिदिन करने की योजना है। इसके लिए एमसीडी और रियायतग्राही कंपनी के बीच 20 वर्ष की अवधि का समझौता होने जा रहा है।
ओखला वेस्ट-टू-एनर्जी संयंत्र का पिछले 12 वर्षों से मेसर्स तिमारपुर-ओखला वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड संचालन कर रही है। वर्तमान रियायत अवधि वर्ष 2037 तक वैध है। अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली में प्रतिदिन लगभग 11,500 टन ठोस कचरा उत्पन्न हो रहा है, जबकि मौजूदा प्रसंस्करण क्षमता करीब 7,500 टन प्रतिदिन की है। शेष कचरा अब भी गाजीपुर, भलस्वा और ओखला लैंडफिल स्थलों पर डाला जा रहा है। इससे पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी संकट गहराता जा रहा है।
एमसीडी का कहना है कि यह प्रस्ताव राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) और सुप्रीम कोर्ट में एमसी मेहता बनाम भारत संघ मामले में दिए गए निर्देशों के अनुरूप है, जिनमें प्रसंस्करण अंतर को जल्द खत्म करने पर जोर दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, प्रस्तावित क्षमता विस्तार के लिए सक्षम प्राधिकारी से अनुमति पहले ही प्राप्त की जा चुकी है। इसके अलावा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय पर्यावरणीय स्वीकृति भी दे चुका है।
वीजीएफ और टैरिफ बना विवाद का संभावित मुद्दा
ओखला संयंत्र के विस्तार के लिए रियायतग्राही कंपनी ने परियोजना लागत के 25 प्रतिशत के बराबर लगभग 90.45 करोड़ रुपये की व्यवहार्यता अंतर निधि (वीजीएफ) की मांग की थी।
हालांकि, बवाना वेस्ट-टू-एनर्जी संयंत्र के लिए स्वीकृत वीजीएफ को आधार बनाते हुए एमसीडी ने ओखला परियोजना के लिए 50 करोड़ रुपये वीजीएफ देने का प्रस्ताव रखा है। यह राशि दिल्ली के लिए स्वीकृत 1152.60 करोड़ रुपये के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन बजट से दिए जाने की योजना है। टैरिफ को लेकर भी प्रस्ताव में अहम प्रावधान किए गए हैं। विस्तारित क्षमता के लिए 8.19 रुपये प्रति यूनिट का अंतिम टैरिफ प्रस्तावित है, जो बवाना और तेहखंड संयंत्रों की तुलना में अधिक है। ऐसे में वीजीएफ उपलब्ध कराए जाने के बाद टैरिफ को बवाना संयंत्र के स्तर पर लाने के लिए दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (डीईआरसी) के माध्यम से पुनरीक्षण की प्रक्रिया अपनाने का निर्णय लिया गया है। मौजूदा क्षमता पर लागू टैरिफ रियायत अवधि समाप्त होने तक जारी रहेगा।
31 मार्च 2027 तक संचालन का लक्ष्य
अनुपूरक समझौते में आरडीएफ और प्री-प्रोसेसिंग संयंत्र, कार्बन क्रेडिट के साझा प्रावधान, वीजीएफ की चरणबद्ध रिहाई और वाणिज्यिक संचालन की समय-सीमा तय की गई है। योजना के अनुसार विस्तारित क्षमता का पूर्ण वाणिज्यिक संचालन 31 मार्च 2027 तक शुरू किया जाना प्रस्तावित है। अब यह प्रस्ताव दिल्ली नगर निगम अधिनियम के तहत स्थायी समिति की मंजूरी के लिए रखा गया है।
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