सही देखभाल से बनता है मजबूत पशु
अक्सर देखा जाता है कि बच्चे के जन्म के वक्त या तुरंत बाद थोड़ी सी लापरवाही भारी नुकसान का कारण बन जाती है. कई बार गलत देखभाल के चलते बछड़े की जन्म के साथ ही मौत हो जाती है, या फिर वह इतना कमजोर रह जाता है कि आगे चलकर पशुपालक को मुनाफा नहीं दे पाता. जबकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सही तरीके से देखभाल की जाए, तो हर बछड़ा भविष्य का मजबूत और लाभ देने वाला पशु बन सकता है.
जन्म के 20 दिन अहम
पशु चिकित्सकों के अनुसार, गाय-भैंस के बच्चा देने के पहले घंटे से ही देखभाल शुरू कर देनी चाहिए. जन्म के बाद के पहले 20 दिन सबसे ज्यादा अहम होते हैं. इस दौरान बछड़े का खान-पान, रहने की जगह और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना जरूरी है. उम्र के अनुसार शेड तैयार होना चाहिए, जहां न ठंड लगे और न ही नमी रहे.
देवघर के कृषि विज्ञान केंद्र में पदस्थापित पशु चिकित्सक डॉ. पूनम सोरेन बताती हैं कि जन्म के बाद बछड़े की पाचन शक्ति काफी कमजोर रहती है. ऐसे में दूध पीने के बाद उसे लूज मोशन की समस्या हो सकती है. कई पशुपालक घबरा कर बछड़े को दूध पिलाना बंद कर देते हैं, जो कि एक बड़ी गलती है. दूध छुड़ाने से बछड़ा और ज्यादा कमजोर हो सकता है, यहां तक कि उसकी जान भी जा सकती है.
दूध पिलाना बंद ना करें
इसलिए ऐसी स्थिति में भी दूध पिलाना बंद नहीं करना चाहिए. इसके साथ कुछ आसान घरेलू उपाय भी किए जा सकते हैं. जैसे मेथी और अजवाइन को हल्का भूनकर उसमें गुड़ मिलाकर एक छोटा गोला बना लें और बछड़े को खिलाएं. इससे पाचन ठीक रहता है और लूज मोशन में भी राहत मिलती है. साथ ही धीरे-धीरे बछड़े को थोड़ा-थोड़ा हरा चारा देना भी फायदेमंद होता है.
मां की देखभाल भी जरूरी
सिर्फ बच्चे की ही नहीं, बल्कि जिस गाय या भैंस ने बच्चा दिया है उसकी देखभाल भी उतनी ही जरूरी है. ब्याई हुई गाय-भैंस को लगातार हरा चारा और संतुलित आहार देना चाहिए. इससे मां और बच्चा दोनों स्वस्थ रहते हैं, दूध उत्पादन पर भी कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता और बछड़ा तेजी से ताकत पकड़ता है.
कुल मिलाकर, पशुपालन में सफलता का मंत्र यही है कि बछड़े के जन्म से लेकर शुरुआती 20 दिनों तक पूरी सावधानी बरती जाए. सही देखभाल, संतुलित आहार और थोड़ी सी समझदारी से हर पशुपालक अपने बछड़े को मुनाफा देने वाला मजबूत पशु बना सकता है.
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