हम लोग बनारस घूमने के लिए जा रहे थे, इसके लिए हमने पांच–छह दिन पहले ऑनलाइन बस टिकट बुक किया था। उस समय किराया करीब दो हजार रुपए था, लेकिन आज सुबह अचानक मैसेज आया कि हमारी टिकट कैंसिल हो गई है। अब जब दोबारा टिकट देखने जा रहे हैं तो कीमत दोगुना दिखा रही है। भोपाल के रहने वाले सिद्धेश्वर कर्राहे ने ये तकलीफ बयां की। ऐसी दिक्कत का सामना उन्हें ही नहीं बल्कि कई यात्रियों को करना पड़ा। कई यात्रियों ने दोगुना किराया देकर यात्रा शुरू की तो कई ने यात्रा रद्द कर दी। दरअसल, मध्यप्रदेश में नई परिवहन नीति के खिलाफ प्रदेशभर के बस ऑपरेटर्स ने 2 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी थी। हालांकि दो दिन पहले ही ऑनलाइन टिकट कैंसिल बता दिया गया और ऑफलाइन रेट 3 गुना तक बढ़ा दिए गए। शनिवार देर रात चर्चा के बाद बस संचालकों की सीएम और प्रशासन से कुछ मांगों पर सहमति बनने से दो मार्च से होने वाली हड़ताल स्थगित हो गई है। यात्री और विशेषज्ञ हड़ताल के ऐलान को पैसे लूटने का ड्रामा तक करार दे रहे हैं। उनका कहना है कि दिवाली पर भी ऐसा ही ड्रामा किया गया था और मुनाफाखोरी के बाद सब काम पर लग गए थे। अचानक टिकट कैंसिल होने से यात्रियों की कैसी फजीहत हुई? नई परिवहन नीति में ऐसा क्या है जिसके विरोध में बस संचालक उतरे हैं? क्या हड़ताल की चेतावनी एक बार फिर मुनाफाखोरी का ड्रामा थी… इस रिपोर्ट में पढ़िए- यात्रियों की फजीहत कैसे हुई… आईएसबीटी बस स्टैंड पर विनय पांडेय मिले। उन्होंने बताया कि ट्रेन में लंबी वेटिंग के चलते भोपाल से रीवा बस से जाने का प्लान बनाया था, लेकिन बस ऑपरेटर्स की हड़ताल के चलते दुविधा में फंसे हैं।
उन्होंने कहा, होली पर घर जाना था। ट्रेन की कन्फर्म टिकट नहीं मिल रही है और न बस की कोई गारंटी है। अब बस का किराया भी पहले से डबल हो गया है। मंहगा हुआ टिकट, दिवाली में फ्लाइट के बराबर थे रेट अभी भी कई रूटों पर टिकटों के दाम बढ़ गए हैं। भोपाल से वाराणसी के लिए 3 मार्च का टिकट 5-6 हजार रुपए हो गया है, जो आम दिनों में 1200 रुपए तक होता है। भोपाल से मुंबई का किराया 7 हजार तक दर्शाया गया है, जो आम दिनों में 1500 तक होता है। यह पहली बार नहीं है जब त्योहारों पर बस संचालकों की मनमानी चल रही है। पिछले साल दिवाली में भी कई बसों में आग लगने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की तो कई ऑपरेटर्स ने बसों का संचालन रोक दिया। इसकी आड़ में कई ने यात्रियों से पांच से छह गुना तक किराया वसूला था। 800-900 की जगह 4 से 5 हजार तक वसूला गया था। नई परिवहन नीति में ऐसा क्या जिसका विरोध…
मध्यप्रदेश सरकार की नई परिवहन नीति का उद्देश्य प्रदेश में बस सेवा को संगठित, सस्ती और तकनीक आधारित बनाना है। इसके तहत ‘मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन सेवा’ शुरू की जाएगी, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी मिले। सरकार चाहती है कि यात्रियों को नियमित, सुरक्षित और समयबद्ध बस सेवा उपलब्ध हो। इस योजना के लिए 101 करोड़ 20 लाख रुपए की प्रारंभिक अंशपूंजी स्वीकृत की गई है। राज्य स्तर पर एक होल्डिंग कंपनी बनाई जाएगी, जो विभिन्न कंपनियों और रूट संचालन पर नियंत्रण रखेगी। बस स्टैंड और अन्य अधोसंरचना का विकास PPP मॉडल पर किया जाएगा। निजी बस ऑपरेटर्स को भी तय रूट और अनुबंध के तहत जोड़ा जाएगा। साथ ही, बस संचालन की निगरानी के लिए आईटी प्लेटफॉर्म तैयार किया जाएगा, जिससे पूरी व्यवस्था डिजिटल और पारदर्शी बने। क्यों डर रहे हैं निजी बस संचालक नई परिवहन नीति को लेकर निजी बस संचालकों की मनमानी खत्म हो सकती है। ऑपरेटर्स को डर है कि कहीं यह मॉडल उनके पारंपरिक संचालन को सीमित न कर दे।
सभी रूट होल्डिंग कंपनी के नियंत्रण में आ गए और अनुबंध आधारित व्यवस्था लागू हुई, तो स्वतंत्र रूप से बस चलाने की छूट कम हो सकती है।
साथ ही, सरकारी या अर्ध-सरकारी बसों की एंट्री से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे मुनाफा घटने का अंदेशा है। आने वाले समय मे हमारे धंधे पर बड़ी निजी कंपनियों का कब्जा हो जाएगा और छोटे बस ऑपरेटर खत्म हो जाएंगे। बस संचालकों पर कार्रवाई हो सकती है यात्री सेवा परिषद के अध्यक्ष श्याम सुंदर शर्मा का कहना है कि मध्य प्रदेश में राज्य सड़क परिवहन निगम (एमपीआरटीसी) वर्तमान में अस्तित्व में नहीं है। 1 अप्रैल से सरकार एमपीआरटीसी के माध्यम से वाहनों का संचालन शुरू करना चाहती है।
प्रदेश के मोटर मालिकों का दावा है कि संचालन एमपीआरटीसी के जरिए नहीं, बल्कि उनके द्वारा होना चाहिए। इसको लेकर वे सरकार पर अनावश्यक दबाव बना रहे हैं। शर्मा ने चेतावनी दी कि अगर वे कभी भी हड़ताल पर जाते हैं, तो यह जनहित के खिलाफ होगा और यातायात विभाग का उल्लंघन माना जाएगा।
उन्होंने कहा कि परिवहन विभाग द्वारा जारी अनुज्ञापत्र की शर्तों का उल्लंघन करने पर मोटर मालिकों पर जुर्माना, अर्थदंड लग सकता है, साथ ही परमिट निरस्त करने का अधिकार भी विभाग को है।
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