बजट की घोषणाएं दिल्ली-एनसीआर के किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकती हैं। परंपरागत खेती के साथ पशुपालन और मत्स्य पालन करने वाले किसानों को बजट से सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। बजट में छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने को प्राथमिकता दी गई है। कृषि से जुड़े उद्यमों को सशक्त करने के संकेत हैं।
दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद, फरीदाबाद, झज्जर, रोहतक और सोनीपत समेत एनसीआर के कई इलाकों में किसान खेती के साथ डेयरी, पशुपालन और मत्स्य पालन पर निर्भर हैं। बजट का फोकस केवल फसल उत्पादन तक सीमित न रहकर कृषि आधारित व्यवसायों को बढ़ावा देने पर होना इन किसानों के लिए राहत भरा है।
मत्स्य पालन क्षेत्र में सरकार द्वारा 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास की घोषणा से ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद तालाबों और जलाशयों का वैज्ञानिक उपयोग संभव हो सकेगा। साथ ही मत्स्य पालन से जुड़े स्टार्टअप्स, किसान उत्पादक संगठनों और महिला समूहों को बाजार से जोड़ने की योजना से मछली पालक किसानों को बिचौलियों से मुक्ति मिलने और बेहतर कीमत प्राप्त होने की उम्मीद है।
पशुपालन के लिए ऋण आधारित सब्सिडी कार्यक्रम, पशुधन उद्यमों का आधुनिकीकरण और डेयरी व मुर्गीपालन के लिए एकीकृत मूल्य शृंखला के निर्माण पर जोर दिया गया है। पशुधन किसान उत्पादक संगठनों को प्रोत्साहन मिलने से छोटे किसान संगठित होकर उत्पादन और विपणन कर सकेंगे।
बजट की इन घोषणाओं के जमीन पर सही तरीके से लागू होने पर दिल्ली-एनसीआर के किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ पशुपालन और मत्स्य पालन को मजबूत आय के साधन के रूप में विकसित कर सकेंगे।
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