Broccoli Farming: स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ने से बाजार में ब्रोकली की मांग तेजी से बढ़ी है. सामान्य गोभी की तुलना में इसकी कीमत अधिक होने से किसान कम लागत में मालामाल हो सकते हैं. सही जल निकासी वाली मिट्टी, उन्नत किस्मों और वैज्ञानिक खाद-प्रबंधन के साथ इसकी खेती कर किसान पारंपरिक फसलों से कई गुना ज्यादा लाभ कमा सकते हैं.
किसानों के लिए उभरती लाभकारी सब्जी बाज़ार में हरे रंग की दिखाई देने वाली ब्रोकली अब केवल शहरों तक सीमित सब्जी नहीं रह गई है, बल्कि यह किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक बेहतर विकल्प बनती जा रही है. पहले जहां इसे केवल शहरी उपभोक्ताओं की सब्जी माना जाता था, वहीं अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसकी खेती तेजी से बढ़ रही है.

कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार ने लोकल18 को बताया कि ब्रोकली को पोषण से भरपूर सब्जी माना जाता है. इसमें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन, एंटीऑक्सीडेंट और खनिज तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को कई गंभीर बीमारियों से बचाने में सहायक होते हैं. स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है.

डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार ब्रोकली को हाईली एंटी-कैंसर सब्जी माना जाता है. इसमें मौजूद पोषक तत्व कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव में सहायक होते हैं, जिससे बाजार में इसकी उपयोगिता और मांग दोनों में इजाफा हुआ है.
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आगे कहा कि ब्रोकली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी खेती किसान साल में चार बार तक कर सकते हैं. कम समय में तैयार होने वाली यह फसल कम लागत में अधिक उत्पादन देने में सक्षम है, जिससे किसानों को लगातार आय का स्रोत मिलता है.

खासकर शहरी और कस्बाई बाजारों में ब्रोकली की कीमत सामान्य सब्जियों की तुलना में अधिक रहती है. होटल, रेस्टोरेंट और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के बीच इसकी मांग ज्यादा होने से किसानों को बेहतर मुनाफा मिलता है.

ब्रोकली की खेती के लिए सबसे पहले नर्सरी तैयार करना आवश्यक होता है. बीजों को नर्सरी में बोया जाता है और 25 से 30 दिनों में पौधे तैयार होने पर खेत में रोपाई की जाती है. अच्छी पैदावार के लिए भुरभुरी और जल निकास वाली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है.

ब्रोकली की फसल को अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन समय-समय पर सिंचाई जरूरी है. रोपाई के बाद और फूल बनने के समय खेत में नमी बनाए रखना आवश्यक होता है. कीट और रोगों से बचाव के लिए संतुलित मात्रा में जैविक या अनुशंसित कीटनाशकों का प्रयोग किया जा सकता है.

उन्होंने बताया कि सही देखभाल के साथ 70 से 80 दिनों में ब्रोकली की फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है. एक एकड़ में लगभग 25 हजार रुपये की लागत आती है, जबकि मुनाफा एक लाख रुपये तक हो सकता है. आगे कहा कि वैज्ञानिक तरीके से खेती और बाजार से सीधा जुड़ाव बनाकर ब्रोकली किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है.
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