मध्य प्रदेश में बीते एक दशक से कई फिल्मों और वेब सीरीज का निर्माण हो रहा है। मैं खुद चंदेरी, भोपाल और पीथमपुर में फिल्मों की शूटिंग कर चुका हूँ। फिल्मों के लिहाज़ से मध्य प्रदेश की लोकेशन्स में ताज़गी है और काफी कुछ मध्य प्रदेश के हिस्सों को दिखाया जाना बाकी है। यह बात अभिनेता ब्रजेंद्र काला ने इंदौर प्रवास के दौरान कही।
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<p>उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में अब फिल्म निर्माण के लिए इको-सिस्टम तैयार हो चुका है। वैसे तो देश ही फिल्म सिटी है, अलग से कोई फिल्म सिटी बनाने की ज़रूरत नहीं है। काला ने कहा कि मध्य प्रदेश में पहले से फिल्में बनती आ रही हैं, लेकिन अभी काम ज़्यादा है। यहाँ फिल्म निर्माण पर सरकार सब्सिडी भी दे रही है, इससे भी निर्माता आकर्षित होते हैं। मध्य प्रदेश की लोकेशन्स में ताज़गी भी है।
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काला ने कहा कि हमारे सिनेमा की शुरुआत ग्रामीण अंचलों से हुई थी। धीरे-धीरे फ्रेम में शहर और मेट्रो सिटी आने लगीं। अब हम फिल्मों में शहरों को काफी कुछ दिखा चुके हैं। हम फिल्मों में उन्हें इतना दिखा चुके हैं कि नयापन लगना खत्म हो गया था। अब लोग कुछ फ्रेश मांग रहे थे। आजकल AQI (एक्यूआई) की बात होती है, तो समझ लीजिए कि ज़्यादा फिल्मों के कारण 'प्रदूषण' हो चुका था। फिर हमें ताज़ा हवा चाहिए थी, तो हम फिर गांवों की तरफ लौटे। सिनेमा के बहाने ही गांवों की चिंता हो रही है, यह अच्छी बात है।
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एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मैंने थिएटर किया है और मैं लेखक भी हूँ। जब हम सीन करते हैं तो नैसर्गिक एक्टिंग अपने आप होती है। कई बार हम गलत भी कर देते हैं तो डायरेक्टर हमें टोक देता है।
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