अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में हुए निर्णय, सांगठनिक ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी, 46 प्रांतों की जगह बनेंगे 80 संभाग
माई सिटी रिपोर्टर
आगरा।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अपने स्थापना के शताब्दी वर्ष में कदम रख रहा है। इस ऐतिहासिक पड़ाव पर संघ ने समाज में बदलाव लाने के लिए पंच परिवर्तन का मंत्र दिया है। पानीपत में तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में तय किया गया कि संघ का कार्य अब केवल शाखाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्वदेशी और पारिवारिक मूल्यों के जरिए ब्रज के हर गांव और बस्ती के ड्राइंग रूम तक पहुंचेगा।
अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में शामिल ब्रज प्रांत प्रचार प्रमुख कीर्ति कुमार ने बताया कि शताब्दी वर्ष में संगठन विस्तार और समाज की सज्जन शक्ति को एकजुट करने पर विशेष जोर रहा। उन्होंने बताया कि ब्रज प्रांत में 5485 शाखाएं सक्रिय हैं। संघ के विस्तार की दृष्टि से ब्रज प्रांत में आगरा, बरेली, अलीगढ़ मंडल में शाखाएं बढ़ी हैं। ब्रज प्रांत के 3709 स्थानों पर कुल 5485 शाखाएं लग रही हैं। देशभर में 55,683 स्थानों पर शाखाओं का आंकड़ा 88,949 तक पहुंच गया है। संपर्क अभियान से ब्रज के 39 लाख घरों में दस्तक दी गई। 16,350 गांवों और 1722 बस्तियों में सघन जनसंपर्क किया गया। बिना किसी भेदभाव के 39,35,008 घरों में स्वयंसेवकों ने सीधा संवाद किया। समाज को जोड़ने के लिए ब्रज में 1448 हिंदू सम्मेलन हुए, जिनमें लगभग 16 लाख (15,92,652) बंधु-भगिनियों ने सहभागिता की।
ये है पंच परिवर्तन का एजेंडा
सामाजिक समरसता: जातिगत भेदभाव मिटाना।
पर्यावरण संरक्षण: प्रकृति के प्रति जागरूकता।
कुटुम्ब प्रबोधन: संयुक्त परिवार, संस्कारों का संरक्षण।
स्व का बोध: स्वदेशी और भारतीय जीवन पद्धति पर गर्व।
नागरिक कर्तव्य: देश के प्रति जिम्मेदारियों का पालन।
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