इससे पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. ऐसे में बोकारो के चास पेट क्लीनिक के पशु चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार ने खरगोशों में होने वाली प्रमुख बीमारियों, उनके लक्षण और रोकथाम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है.
खरगोश की आंखें सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं
डॉ. अनिल के अनुसार, मिक्सोमेटोसिस एक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से खरगोश की आंखों को प्रभावित करती है. इस बीमारी से ग्रसित खरगोश की आंखें सामान्य से अधिक लाल हो जाती हैं और आंखों से लगातार पानी निकलता रहता है, और कई मामलों में धीरे-धीरे आंखों की रोशनी भी चली जाती है. इस बीमारी का कोई प्रभावी इलाज नहीं है, लेकिन टीकाकरण (वैक्सीन) के माध्यम से खरगोश को इससे सुरक्षित रखा जा सकता है.
बेहद खतरनाक वायरल बीमारी
दूसरी बीमारी है आरएचडी, जिसे रैबिट हेमरेजिक डिजीज भी कहा जाता है. यह एक अत्यंत खतरनाक वायरल बीमारी है. इसमें खरगोश को तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, नाक से खून आना और झटके (दौरे) जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. इस बीमारी में खरगोश की अचानक मौत भी हो सकती है. ऐसे में समय रहते पशु चिकित्सक से संपर्क कर पशु को बचाया जा सकता है.
दूषित खाने से होती है यह बीमारी
ई. कोलाई एक बैक्टीरियल बीमारी है, जो दूषित भोजन, गंदे पानी और साफ-सफाई की कमी के कारण होती है. इस बीमारी में खरगोश को पतला दस्त, डिहाइड्रेशन, भूख न लगना और कमजोरी जैसी समस्याएं होने लगती हैं, और इलाज में देरी होने पर कई मामलों में खरगोश की मौत भी हो जाती है. ऐसे में खरगोश को हमेशा साफ, स्वच्छ और ताजा भोजन कराना चाहिए.
सफाई न करने से होता है यह रोग
कोक्सीडायोसिस खरगोशों में पाया जाने वाला एक आंतरिक परजीवी रोग है. यह बीमारी आमतौर पर पिंजरे की नियमित सफाई न होने के कारण फैलती है, और इस बीमारी से बचाव के लिए पिंजरे की स्वच्छता बेहद जरूरी है. साथ ही पशु चिकित्सक की सलाह से टीकाकरण और कीड़े मारने की दवा पशु को खिलाना बहुत जरूरी है, जो खरगोशों को गंभीर रोग से बचाता है.
दांतों की ट्रिमिंग जरूरी है
खरगोशों में दांतों की समस्या भी आम है, जिसे मेलोक्लूजन कहा जाता है. इसमें खरगोश के दांत सामान्य से अधिक बढ़ जाते हैं, जिससे उन्हें खाना चबाने में परेशानी होती है. समय पर इलाज न होने पर खरगोश कमजोर हो सकता है. इस समस्या से बचाव के लिए पशु चिकित्सक की सलाह से दांतों की समय-समय पर ट्रिमिंग कराना जरूरी है.
ईयर माइट्स एक बाहरी परजीवी रोग है, जिसमें खरगोश के कानों में छोटे-छोटे दाने, पपड़ी जमना और तेज खुजली जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं. सही समय पर डॉक्टर से सलाह लेकर उपचार कराने से इस बीमारी से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है.
ठंड में निमोनिया भी होता है
वहीं सर्दियों के मौसम में खरगोशों में निमोनिया का खतरा अधिक बढ़ जाता है. इस बीमारी में सर्दी-जुकाम, नाक से पानी आना, सांस लेते समय आवाज आना, बुखार और सुस्ती जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. ऐसे में समय पर एंटीबायोटिक उपचार और पौष्टिक भोजन देने से खरगोश को इस बीमारी से सुरक्षित रखा जा सकता है.
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.