ऐसे आया ख्याल
खास बातचीत में बबली कुमारी ने बताया कि उन्हें सेनेटरी पैड बिजनेस का विचार गुजरात यात्रा के दौरान आया, जहां उन्होंने देखा कि किस तरह छोटे स्तर पर महिलाएं आधुनिक तरीके से सेनेटरी पैड यूनिट चला रही हैं. उसी अनुभव से प्रेरित होकर उन्होंने बोकारो में सेनेटरी पैड निर्माण की यूनिट स्थापित की. आज उनकी यूनिट में कुल 8 महिलाएं कार्यरत हैं. इसके अलावा अनौपचारिक रूप से 60 से अधिक महिलाएं सेल्स से जुड़कर रोजगार प्राप्त कर रही हैं.
सस्ते और गुणवत्ता वाले
आगे बबली कुमारी ने बताया कि यहां तैयार होने वाले सेनेटरी पैड बोकारो की मेडिकल दुकानों के साथ-साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अमेज़न और फ्लिपकार्ट के माध्यम से भी बिकते हैं. यहां तैयार सेनेटरी पैड बाज़ार में उपलब्ध अन्य ब्रांड्स की तुलना में सस्ते और बेहतर गुणवत्ता वाले हैं, जो 7 लेयर के प्रोटेक्शन के साथ आते हैं. वहीं इस प्रोजेक्ट में उन्हें लगभग 21 लाख रुपये की लागत आई है.
ऐसे की थी बिजनेस की शुरुआत
अपने संघर्षों को याद करते हुए बबली कुमारी ने बताया कि करीब 15 वर्ष पहले उनके पति सुजीत सिंह का निधन हो गया था. इसके बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई. हालात से हार मानने के बजाय उन्होंने आगे बढ़ने का निर्णय लिया. शुरुआत में उन्होंने कपड़ों से जुड़े कई छोटे-छोटे व्यवसाय आज़माए.
इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री सृजन योजना के तहत 5 लाख रुपये का लोन लेकर स्कूल ड्रेस निर्माण का व्यवसाय शुरू किया, जो सफल रहा. इसी सफलता से उत्साहित होकर उन्होंने करीब एक साल पहले सेनेटरी पैड निर्माण के व्यवसाय की शुरुआत की, जो आज सफलतापूर्वक चल रहा है.
ऐसा हो तो मिलेगा प्रोत्साहन
भविष्य की योजनाओं को लेकर महिला उद्यमी बबली कुमारी ने बताया कि उनके उत्पाद को उत्तर प्रदेश की तर्ज पर ‘वन प्रोडक्ट वन डिस्ट्रिक्ट’ योजना के अंतर्गत प्रोत्साहन मिले. उनका मानना है कि यदि बोकारो में बिना किसी बिचौलिये के और सीधे उत्पाद का प्रचार-प्रसार किया जाए, तो यह महिलाओं के लिए और अधिक लाभकारी साबित होगा.
आखिर में बबली कुमारी ने महिलाओं को संदेश देते हुए कहा कि हर महिला में कुछ गुण और क्षमता होती है. अगर मेहनत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ा जाए, तो सफलता मिलने में देर नहीं लगती.
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