मधेपुरा के बीएन मंडल विश्वविद्यालय परिसर में संयुक्त छात्र संगठन की ओर से एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। प्रेस वार्ता में छात्र नेताओं ने पीएम-उषा योजना के तहत आयोजित सेमिनार- वर्कशॉप को कथित छात्र संगठन द्वारा अवरुद्ध किए जाने को छात्रों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ बताया। बीएनएमयू संस्कृति, सभ्यता और छात्र हितों के खिलाफ युवा राजद जिला प्रधान महासचिव सह प्रवक्ता संजीव कुमार ने कहा कि सेमिनार में जाति-धर्म का जहर घोलकर उसे बाधित करना न केवल सामाजिक न्याय विरोधी मानसिकता को दर्शाता है, बल्कि यह बीएनएमयू, मधेपुरा की संस्कृति, सभ्यता और छात्र हितों के भी खिलाफ है। एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष निशांत यादव ने कहा कि विश्वविद्यालयों में होने वाले ऐसे सेमिनार वैज्ञानिक सोच, तार्किक विवेक और शोध संस्कृति को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सेमिनार में बांग्लादेश या फिलीस्तीन के स्कॉलर होने से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि इससे शोधार्थियों का भविष्य उज्ज्वल होगा और छात्रों पर कोई आर्थिक बोझ भी नहीं पड़ेगा। एआईएसएफ के जिलाध्यक्ष वसीमउद्दीन नन्हें ने कहा कि जब भारत सरकार चीन, नेपाल और सऊदी अरब जैसे देशों के शासनाध्यक्षों का स्वागत कर सकती है, तो बीएनएमयू में बांग्लादेश और फिलीस्तीन के विद्वानों का स्वागत क्यों नहीं हो सकता। 44 दिनों के अंतरराष्ट्रीय सेमिनार को पुनः प्रारंभ किया जाए आइसा प्रतिनिधि कृष्णा ने सेमिनार को पिछड़े ग्रामीण क्षेत्र में स्थापित बीएनएमयू को सशक्त बनाने और समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत आवश्यक बताया। संयुक्त छात्र संगठन ने मांग की कि 28 जनवरी से प्रस्तावित 44 दिनों के अंतरराष्ट्रीय सेमिनार को एक सप्ताह के भीतर पुनः प्रारंभ किया जाए, अवरुद्ध तिथियों का पुनर्निर्धारण हो तथा आमंत्रित विदेशी स्कॉलरों को अवसर दिया जाए। अन्यथा संगठन आंदोलन के लिए बाध्य होगा, जिसकी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी। इससे पूर्व शुक्रवार संयुक्त छात्र संगठन का एक प्रतिनिधिमंडल कुलसचिव को मांग पत्र सौंपा था। मौके पर अमित कुमार, आशीष कुमार, सुमन कुमार सहित अन्य छात्र नेता उपस्थित थे।
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