भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए आज नामांकन दाखिल करेंगे। वह बिहार से पहले ऐसे नेता हैं, जिन्हें भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना जा रहा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की इस प्रक्रिया में भाग होने के लिए भाजपा के सभी मुख्यमंत्री, पार्टी की राज्य इकाइयों के प्रमुख और अन्य प्रमुख नेता पार्टी मुख्यालय में एकत्रित होंगे। संभावना है कि नितिन 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में निर्विरोध चुन लिए जाएंगे, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सहित पार्टी नेतृत्व इस पद के लिए उनकी उम्मीदवारी का समर्थन कर रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा था कि “नितिन नवीन जी ने एक कर्मठ कार्यकर्ता के रूप में अपनी पहचान बनाई है। वह एक युवा और कर्मठ नेता हैं, जिन्हें संगठनात्मक अनुभव का भरपूर लाभ है और बिहार में विधायक और मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल प्रभावशाली रहा है। उन्होंने जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए अथक परिश्रम किया है। वह अपने विनम्र स्वभाव और व्यावहारिक कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। मुझे विश्वास है कि उनकी ऊर्जा और समर्पण आने वाले समय में हमारी पार्टी को मजबूती प्रदान करेंगे। वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव हो, या बिहार में प्रदेश युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष या छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी, उन्होंने संगठन के हर दायित्व को पूरी निष्ठा और सफलता से निभाया है। बिहार में पांच बार विधायक एवं प्रदेश सरकार में मंत्री के रूप में उनके पास जनता के बीच लम्बे समय से कार्य करने का अनुभव है।
बचपन पीरमुहानी इलाके में बीता, पढ़ाई कहां हुई?
नितिन नवीन भाजपा के बड़े नेताओं से एक और जेपी आंदोलन से राजनीति की शुरुआत करने वाले दिवंगत नवीन सिन्हा के बेटे हैं। 23 मई 1980 पटना में नितिन नवीन का जन्म हुआ है। भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए नितिन नवीन का बचपन पीरमुहानी और लोहरानीपुर इलाके में बीता। उनके पिता दिवंगत नवीन किशोर सिन्हा इधर ही रहते थे। हालांकि विधायक आवास मिलने के बाद से लंबे समय तक मिलर स्कूल के आसपास का आशियाना रहा। नितिन की शुरुआती पढ़ाई बिहार के सबसे प्रतिष्ठित प्राइवेट स्कूल- संत माइकल हाई स्कूल से हुई थी। यहीं से 1996 में 10वीं की सीबीएसई परीक्षा पास करने के बाद वह दिल्ली में 12वीं करने गए। 1998 में 12वीं करने के बाद वह मूल धारा की स्नातक से अलग पढ़ाई करने के लिए प्रतियोगिता की तैयारी में जुटे थे।
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पिता मंत्री बनते-बनते रह गए, बेटे तीन बार मंत्री बने
2005 में पिता नवीन किशोर सिन्हा भाजपा विधायक के रूप में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार के उप मुख्यमंत्री नहीं तो मंत्री जरूर बनते, लेकिन इससे पहले दिल्ली से उनकी मौत की खबर आई। इससे नितिन की पढ़ाई-तैयारी जहां की तहां रह गई। अगले साल उनकी सीट पर उप चुनाव हुआ तो नितिन विधायक बने। विधायक के रूप में नितिन नवीन पटना पश्चिमी क्षेत्र (अब, बांकीपुर विधानसभा) की पहचान बने। उप चुनाव में जीते और फिर हमेशा बड़े अंतर से जीतते ही रहे। केंद्र में भी जब भाजपा की सरकार बन गई तो नितिन नवीन का राजनीतिक रूप बढ़ा। विजन की स्पष्टता और कार्यकर्ताओं के बीच पकड़ को समझते हुए भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। 2016 से 2019 तक भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कार्यकर्ताओं का नेटवर्क खड़ा करना नितिन नवीन के लिए फायदेमंद साबित हुआ। राष्ट्रीय स्तर पर संगठन में पहचान बनी तो दूसरे राज्य की तरफ भी भाजपा ने उन्हें भेजा। 2019 में सिक्कम का संगठन प्रभारी के रूप में और फिर जुलाई 2024 से छत्तीसगढ़ में नितिन नवीन ने संगठन के लिए जो काम किया और जैसी सक्रियता दिखाई, उसे स्वीकारने का प्रमाण है यह ताजा फैसला। छत्तीसगढ़ प्रभारी के रूप में वह भाजपा के लिए पुनर्वापसी का मंत्र साबित हुए। बिहार सरकार में नितिन नवीन कुल पांच बार विधायक बने और तीन बार मंत्री बने। आखिरी बार 2025 विधानसभा चुनाव जीतने के बाद मंत्री बने लेकिन कुछ ही वक्त बाद उन्हें राष्ट्रीय कार्यकरी अध्यक्ष की कमान सौंप दी गई। इसलिए उन्होंने बिहार सरकार के मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
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