यादव ने अपने संबोधन में कहा कि देश और प्रदेश के शीर्ष पदों पर पिछड़ा वर्ग के नेता हैं, फिर भी राजनीतिक रूप से पिछड़े वर्ग एकजुट नहीं हो पाते। इसी संदर्भ में उन्होंने ब्राह्मण समाज को लेकर ऐसे शब्दों का प्रयोग किया, जिसे कई लोगों ने आपत्तिजनक और समाज को ठेस पहुंचाने वाला बताया। वीडियो वायरल होने के बाद ब्राह्मण समाज के लोगों ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जाहिर की और भाजपा नेतृत्व से कार्रवाई की मांग भी उठने लगी।
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मामला तूल पकड़ता देख भाजपा जिला अध्यक्ष शेषराव यादव ने तत्काल वीडियो बयान जारी कर सफाई दी। उन्होंने कहा सोशल मीडिया पर चल रहा वीडियो सत्य है। पाल समाज के कार्यक्रम में मैं सभी समाजों की एकजुटता और संगठन को लेकर बात कर रहा था। भाषण के दौरान यदि मेरे किसी शब्द या कथन से ब्राह्मण समाज या किसी व्यक्ति की भावना आहत हुई है, तो मैं उनसे क्षमा चाहता हूं। मेरा उद्देश्य किसी समाज को ठेस पहुंचाना नहीं था।
उन्होंने आगे कहा कि वे किसी भी समाज के बीच भेदभाव में विश्वास नहीं रखते और भाजपा भी सामाजिक समरसता की विचारधारा पर चलने वाली पार्टी है। इस बयान और माफी के बाद भी जिले की राजनीति गरमा गई है। विपक्ष ने इसे भाजपा की सोच से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं, वहीं भाजपा समर्थकों का कहना है कि बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है और जिला अध्यक्ष ने समय रहते माफी मांगकर संवेदनशीलता दिखाई है।
चौरई में सकल ब्राह्मण समाज ने जताया विरोध
प्रकरण को लेकर चौरई क्षेत्र में सकल ब्राह्मण समाज ने विरोध दर्ज कराया है। समाज के प्रतिनिधियों ने भाजपा जिला अध्यक्ष के बयान को अपमानजनक बताते हुए एसडीएम के माध्यम से प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की।
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ब्राह्मण समाज एवं सनातन धर्म के कथित अपमान को लेकर जिले में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। ज्ञापन में समाज ने आरोप लगाया कि वर्तमान समय में ब्राह्मण समाज के विरुद्ध सुनियोजित तरीके से जातिगत द्वेष फैलाया जा रहा है और समाज को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे भावनाएं आहत हो रही हैं।
समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान भाजपा जिला अध्यक्ष द्वारा मंच से ब्राह्मण समाज के प्रति आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया, जिससे समाज स्वयं को अपमानित और पीड़ित महसूस कर रहा है।
समाज का कहना है कि किसी भी वर्ग को जातिगत आधार पर नीचा दिखाना न केवल सामाजिक अपराध है, बल्कि इससे सामाजिक सौहार्द्र भी प्रभावित होता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इस मामले में तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
ज्ञापन में प्रयागराज (उत्तरप्रदेश) में मौनी अमावस्या के दिन पूज्य शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी एवं उनके शिष्यों को गंगा स्नान से रोके जाने और कथित पुलिस दुर्व्यवहार की घटना का भी उल्लेख किया गया। समाज ने इसे हिंदू धर्म के प्रमुख धर्मगुरु का अपमान बताते हुए गहरा रोष व्यक्त किया और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।
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